BJP President: भाजपा का नया अध्यक्ष कौन? ब्राह्मण बनाम OBC की रेस में कौन आगे, RSS की मुहर से खुला बड़ा राज!
BJP President Election Update News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सियासी गलियारों में जबरदस्त हलचल है। पार्टी के अंदर इस समय दो खेमे सक्रिय हैं - एक चाहता है कि नया अध्यक्ष ब्राह्मण चेहरा हो, जबकि दूसरा समूह चाहता है कि पार्टी किसी OBC नेता को मौका दे। इन दोनों संभावनाओं के बीच अब गेंद आरएसएस (RSS) के पाले में जा चुकी है। संघ के संकेत का इंतजार हर नेता कर रहा है क्योंकि अंतिम फैसला वही करेगा कि बीजेपी का अगला 'कप्तान' कौन होगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने राष्ट्रीय और यूपी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर आंतरिक मंथन लगभग पूरा कर लिया है। कई नामों पर रायशुमारी हो चुकी है और अब फैसला सिर्फ शीर्ष नेतृत्व को करना है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही दोनों नामों की घोषणा करेगी।

फिलहाल बीजेपी गुजरात और झारखंड के प्रदेश अध्यक्षों का नाम पहले ही घोषित कर चुकी है। अब बारी है दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक और त्रिपुरा की। इनमें से कुछ राज्यों में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी चल रही है। लेकिन सभी की निगाहें फिलहाल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर टिकी हैं।
'उम्र, अनुभव और ऊर्जा' - तीन कसौटियों पर होगी अगली नियुक्ति
बीजेपी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक इस बार पार्टी ऐसा चेहरा चाहती है जो ऊर्जावान हो, उम्र में अपेक्षाकृत युवा हो और संगठन के अंदरूनी कामकाज को बारीकी से समझता हो। एक पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की उम्र लगभग 60 वर्ष के आसपास होनी चाहिए - ताकि अनुभव और जोश, दोनों का संतुलन बना रहे।
वहीं, दक्षिण भारत से जुड़े एक केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि वह खुद को इस पद के लिए "सक्षम नहीं" मानते। इसका मतलब है कि इस बार पार्टी किसी ऐसे नेता पर भरोसा जताना चाहती है जो संगठन को अगले लोकसभा चुनाव तक एकजुट रख सके और क्षेत्रीय समीकरणों का संतुलन बना सके।
RSS की 'मौन स्वीकृति' के बिना नहीं होगा कोई फैसला
बीजेपी में संगठनात्मक नियुक्तियों पर अंतिम मुहर हमेशा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की होती है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन सभी नामों को पहले संघ के साथ साझा करेगा और फिर उसकी सहमति के बाद ही घोषणा की जाएगी।
संघ परिवार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने मीडिया से कहा -"सरकार और संगठन दो अलग इकाइयां हैं। सरकार में संघ का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता, लेकिन संगठन संघ परिवार का हिस्सा है। इसलिए संगठन की अगुवाई करने वाला व्यक्ति एक सक्षम संगठक होना चाहिए।"
इस बयान से इतना तो तय है कि चाहे नाम कोई भी हो, उसकी मंजूरी नागपुर (RSS मुख्यालय) से ही मिलेगी।
ब्राह्मण बनाम OBC - किसका पलड़ा भारी?
उत्तर प्रदेश की राजनीति को देखते हुए यह सवाल सबसे अहम हो गया है। राज्य में पहले से योगी आदित्यनाथ (क्षत्रिय) मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व चाहती है कि संगठनात्मक स्तर पर किसी OBC चेहरे को आगे लाया जाए ताकि जातीय संतुलन कायम रहे।
दूसरी ओर, केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले से OBC समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर अब एक ब्राह्मण चेहरा अध्यक्ष बने। यह जातीय संतुलन के लिहाज से पार्टी के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है।
भाजपा अध्यक्ष: कौन-कौन हैं रेस में? - संभावित नामों की लिस्ट में ये नेता आगे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में कई दिग्गजों के नाम सामने आ चुके हैं।
- भूपेंद्र यादव (केंद्रीय मंत्री) - संगठन और रणनीति, दोनों में निपुण।
- धर्मेंद्र प्रधान (शिक्षा मंत्री) - संघ पृष्ठभूमि और मोदी के करीबी माने जाते हैं।
- अश्विनी वैष्णव (रेल मंत्री) - प्रशासनिक अनुभव और साफ-सुथरी छवि के कारण चर्चा में।
- शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय मंत्री) - पुराने संगठनकर्ता और RSS से गहरे जुड़े।
- सी.टी. रवि और सुनील बंसल के नाम भी बैकअप ऑप्शन के तौर पर देखे जा रहे हैं।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन सभी में भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वहीं, यूपी संगठन के लिए किसी युवा OBC चेहरे पर भी विचार चल रहा है।
राजनीतिक गणित और संघ का संतुलन
बीजेपी का पूरा फोकस इस वक्त 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव पर है। पार्टी चाहती है कि संगठन और सरकार, दोनों में समन्वय बना रहे। यही कारण है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष, दोनों की नियुक्ति साथ-साथ सोच-समझकर की जा रही है। संघ भी इस बात से सहमत है कि पार्टी को ऐसे चेहरों की जरूरत है जो "संगठन चलाने वाले हों, न कि सिर्फ चेहरा दिखाने वाले।"
बीजेपी में नया अध्यक्ष सिर्फ एक औपचारिक नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति का पहला संकेत भी होगी। अगर ब्राह्मण चेहरे को मौका मिला तो यह संकेत होगा कि पार्टी संतुलन साधने की कोशिश में है, और अगर OBC चेहरा आया तो यह 2027 और 2029 के चुनावों के लिए जातीय समीकरणों को साधने का मास्टरस्ट्रोक होगा। लेकिन इतना तय है, जो भी नाम आएगा, उस पर RSS की मुहर जरूर होगी। और वही तय करेगा कि बीजेपी की सियासी नैया का अगला खेवैया कौन बनेगा।












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