2019 का गेम जीतने के लिए बीजेपी हर सांसद के साथ तैनात करेगी ‘टीम-23’
नई दिल्ली। 2014 के लोकसभा चुनावों ने भारत में चुनाव लड़ने के तरीके को बदल दिया। बीजेपी ने जिस तरह से चुनावी प्रचार में संगठन और टेक्नोलॉजी की ताकत का इस्तेमाल किया था उसने तमाम विरोधियों को चित्त कर दिया था। उसके बाद सभी राजनीतिक दलों ने समझा की टेक्नोलॉजी किस तरह से चुनाव पर असर डाल सकती है। अब हर राजनीतिक दल के अपने आईटी और पीआर सेल हैं जो ना केवल सोशल मीडिया पर प्राचार करते हैं बल्कि चुनावी प्रचार की पूरी रणनीति तैयार करते हैं। बीजेपी निश्चित तौर पर इस मामले में दूसरे राजनीतिक दलों से आगे है। अब पार्टी एक और बड़ा कदम उठा रही है। द प्रिटं में छपी खबर के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी अपने मौजूदा हर एक सांसद को प्रचार के लिए एक व्यक्तिगत टीम दे रही है।

माइक्रो मैनेजमेंट का दिखेगा कमाल
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनाव में अपने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं और 2019 के लोकसभा चुनावों में भी वो ना केवल परंपरागत बल्कि एक नए तरीके से चुनावी मैनेजमेंट की तैयारी में लगे हुए हैं। कहा जा रहा है अमित शाह जिस तरह से इस बार चुनावों की तैयारी कर रहे हैं वो इससे पहले देश में कभी नहीं देखी गई होगी।

सांसद की पर्सनल प्रचार टीम
बीजेपी 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। पार्टी इसके लिए बूथ लेवल से लकेर ऊपर के स्तर तक क्या रणनीति अपनाई जाएगी इस पर बारिकी से काम कर रही है। पार्टी का वॉर रुम ना केवल मुद्दों बल्कि विपक्ष की भी हर एक राजनीतिक गतिविधी पर नजर बनाए हुए है। पार्टी का मकसद हर एक आदमी तक सरकार के काम को पहुंचाने का है और इसे अलग-अलग स्तर और अलग-अलग तरीके से किए जाने की रणनीति है। सूत्रों के जरिए द प्रिटं को मिली जानकारी के मुताबिक हाल में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक मंय अमित शाह ने पार्टी के हर एक सांसद को 23 लोगों की एक व्यक्तिगत टीम देने के लिए कहा है। ये भी कहा गया है कि इन सभी लोगों का खर्च पार्टी उठाएगी। ये टीम हर सांसद को मिलेगी चाहे उसे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए टिकट मिले या ना मिले।
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हर सांसद का कॉल सेंटर
योजना के मुताबिक प्रत्येक सांसद के लिए एक कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा जिसमें 15 लोग टेलीफेन कॉल का प्रबंधन देखेंगे और बड़े पैमाने पर एक साथ एसएमएस भेजेंगे। टीम के चार और लोग सोशल मीडिया नेटवर्किंग में सांसद की मदद करेंगे ताकि वो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी उपस्थिति को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह का पालन कर सकें। कहा जा रहा है कि नरेद्र मोदी ने दोहराया है कि हर एक सांसद के फेसबुक पर लगभग तीन लाख लाइक होने चाहिए और साथ ही साथ ट्विटर पर फॉलोअर्स की अच्छी खासी संख्या होनी चाहिए।

मीडिया मैनेजमेंट पर ध्यान
टीम के बाकी चार कार्यकर्ता 'मीडिया टीम' का हिस्सा होंगे, जो सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों के साथ-साथ सांसद के बारे में प्रचार अभियान का काम संभालेंगे। इन टीमों का काम सांसदों द्वारा की जीने वाली हर एक रैली, बैठक और यात्रा के प्रेस कवरेज को भी सुनिश्चित कराना होगा। मीडिया कवरेज का फोकस बड़े राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों पर नहीं होगा, बल्कि स्थानीय दैनिक समाचार पत्र और टीवी चैनल होंगे जो निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों तक सूचना पहुंचाने का प्राथमिक स्रोत रहते हैं।

नजर रखने के लिए केंद्रीय टीम
सांसदों को दी जानी वाली इन टीमों की निगरानी के लिए बीजेपी की एक केंद्रीय टीम भी होगी। अमित शाह ने 18 से 20 लोगों की एक टीम का चयन किया है जिन्होंने केंद्रीय या राज्य स्तर पर पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं और संगठन के बारे में सारी जानकारी रखते हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने हर एक निर्वाचन क्षेत्र के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की है और ये उस रणनीति का पहला स्तर है। इससे पार्टी के सांसद को उस स्तर का प्रचार करने में मदद मिलेगी जिस तरह से पार्टी चाहती है। पार्टी अलग-अलग स्तरों पर लोगों तक पहुंचने और अपनी बात पहुंचाने के लिए अलग रणनीति अपनाएगी।
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