एसपी और जेडी(यू) का बड़ा राजनीतिक पैंतरा, अब ऐसे हो रहा है सीटों को लेकर तोल-मोल
नई दिल्ली। साल के आखिर में होने विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण बैठाने में लगे हैं। इन चुनावों के लिए जहां बीजेपी और कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल बड़े पैमाने पर प्रबंधन की तैयारी में लगे हैं तो वहीं छोटे राजनीतिक दल भी इन चुनावों को अपनी ताकत और अपने दायरे को बढ़ाने के तौर पर देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी और बिहार में नीतीश कुमार की जेडी(यू) अपने-अपने राज्यों से बाहर पैर पसारने की अब कोशिश कर रही हैं और इसी रणनीति को सामने रखते हुए दोनों दल अपने-अपने सहयोगियों से सीटों के बंटवारे को लेकर तोल-मोल कर रहे हैं। इन दलों की अब कोशिश है गठबंधन की राजनीति का फायदा उठाकर ये अपने दबदबे वाले मूल राज्यों से बाहर भी अपने संगठन को मजबूत करें। इसका सबसे अच्छा रास्ता ये दिख रहा है कि दूसरे राज्यों में मजबूत पार्टी से कुछ सीटों पर गठबंधन किया जाए और अगर इन सीटों पर जीत मिलती है तो इससे उस राज्य में भी पार्टी को मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी।

बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए के घटकों, बीजेपी, जेडी(यू), लोक जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के बीच अभी कोई सहमति नहीं बनी है। लेकिन इसके बावजूद खबर है कि बीजेपी, जेडी(यू) को उत्तर प्रदेश में एक सीट और झारखंड में भी एक लोकसभा सीट देने को राजी हो गई है। जेडी (यू) पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों में से एक पर अपने महासचिव के सी त्यागी को मैदान में उतारना चाहती है और वहीं जेडी (यू) झारखंड से भी एक उम्मीदवार को लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती है। जेडी(यू) ने उत्तर प्रदेश में पहले भी लोकसभा चुनाव लड़े हैं लेकिन उसका पूरा ध्यान पूर्वी उत्तर प्रदेश पर केंद्रित रहा था। इसका मुख्य कारण ये था कि यहां की संस्कृति और भाषा बिहार से मेल खाती है।

सपा और कांग्रेस में तोल-मोल
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था लेकिन अब पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करके दूसरे राज्यों में भी अपने विस्तार करने की कोशिश में है। एसपी न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहता है। कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी ने 201 9 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में गठबंधन से पहले इस बारे में कुछ शर्तें कांग्रेस के सामने रखी हैं। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस और एसपी के वरिष्ठ नेता इस मामले पर मतभेदों को कम करने के लिए चर्चा भी कर रहे हैं।
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यूपी से बाहर भी मिले मौका
समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में समझौते के बदले में कांग्रेस से आगामी विधनसभा चुनाव वाले राज्यों में सीट चाहती है। खबर के मुताबिक समाजवादी पार्टी अब तीन और हिंदी भाषित राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपना आधार बढ़ाना चाहती है। इन तीन राज्यों में आगामी नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने की संभावना है। मध्यप्रदेश को लेकर अखिलेश यादव कह चुके हैं कि उनकी पार्टी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस बड़ा दल है इसलिए उसे इसे लेकर पहल करनी चाहिए। भोपाल मे कुछ छोटे दलों की हुई बैठक मे जिसमें सपा भी शामिल थी में ये सहमति बन गई है कि अगर कांग्रेस गठबंधन के लिए पहल करती है तो वो इसके लिए तैयार हैं।

बीएसपी की रणनीति पर असमंजस
इस बीच बहुजन समाज पार्टी की रणनीति को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बरकरार है कि क्या वो गठबंधन करना चाहती है या नहीं। बीएसपी भी कांग्रेस के साथ एक अखिल भारतीय गठबंधन चाहती तो है और दोनों के बीच चर्चा भी हो रही थी लेकिन मायावती ने छत्तीसगढ़ में कांग्रसे को झटका देते हुए अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से हाथ मिला लिया। बीएसपी ने मध्यप्रदेश में भी 22 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं ने बसपा के साथ व्यापक गठबंधन की आशा नहीं छोड़ी है। खबर है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच आने वाले कुछ दिनों में गठबंधन को लेकर समझौता होने की पूरी उम्मीद है।
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