विपक्ष शासित इन 4 राज्यों में सड़कों पर उतरी बीजेपी, विधानसभा,लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा अभियान
बीजेपी ने आने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए सड़कों पर उतर कर संघर्ष शुरू कर दिया है। इस दौरान पार्टी ने चार विपक्ष शासित राज्यों में विशेष अभियान आरंभ किया है।
बीजेपी को उम्मीद है कि जहां वह सरकार में नहीं है, वहां से अभी से सक्रिय अभियान शुरू करने से राज्य विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में उसे बेहतर रिटर्न मिल सकता है। ये विपक्ष की सरकारों वाले राज्य हैं- राजस्थान, बिहार, तमिलनाडु और तेलंगाना।

राजस्थान में बीजेपी का जारी है अभियान
राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहां जो हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का सिलसिला रहा है, उसकी वजह से बीजेपी को जोश यूं भी हाई है। ऊपर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार हाल में जिस तरह से बहुत गंभीर विवादों में फंसी है, उससे पार्टी की उम्मीद और बढ़ गई है।
'नहीं सहेगा राजस्थान' अभियान
राजस्थान में पार्टी ने अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार पर कथित भ्रष्टाचार, खराब कानून और व्यवस्था और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर 'नहीं सहेगा राजस्थान' अभियान शुरू किया है। 18 जुलाई को बीजेपी युवा मोर्चा के अभियान के दौरान पुलिस ने जो कार्रवाई की थी, उसमें पार्टी के कई कार्यकर्ता बुरी तरह जख्मी भी हो गए थे।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखवात ने ईटी से कहा है, 'राजस्थान के लोगों के सामने भ्रष्टाचार के कई नए मामले सामने आ रहे हैं और अभियान का प्रतिदिन विस्तार हो रहा है।' उन्होंने कहा, 'हमारे नेता और कार्यकर्ता पहले से ही कांग्रेस सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं।'
बिहार में सरकार के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान
उधर बिहार में बीजेपी ने सोमवार से नीतीश कुमार सरकार पर कथित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। यह अभियान 13 जुलाई को पार्टी कार्यकर्ताओं पर हुई बर्बर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ शुरू किया गया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है, 'हस्ताक्षर अभियान पूरे राज्य में चलेगा और 9 अगस्त तक चलाया जाएगा। उसके बाद जुटाए गए हस्ताक्षरों को प्रदेश के राज्यपाल को सौंपा जाएगा।'
चौधरी के मुताबिक, 'बीजेपी तबतक सड़क पर संघर्ष करेगी, जब तक कि नीतीश कुमार को सीएम पद से बेदखल न कर दिया जाए।' पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी को झटका देकर लालू यादव के आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। तब से बीजेपी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की जनसभाएं आयोजित करवा चुकी है। लेकिन, सरकार के खिलाफ कोई बड़ा अभियान अभी तक नहीं शुरू की थी।
'माय लैंड, माय पीपुल एंड मोदी अगेन'
वहीं तमिलनाडु में 28 जुलाई से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई की अगुवाई में एक यात्रा शुरू करने जा रही है, जिसे अमित शाह हरी झंडी दिखाने वाले हैं। पार्टी ने इस यात्रा का थीम रखा है- 'माय लैंड, माय पीपुल एंड मोदी अगेन'। पार्टी के प्रदेश प्रभारी सीटी रवि के मुताबिक, 'यात्रा में इस बात पर जोर रहेगा कि कैसे पीएम मोदी ने तमिल संस्कृति को राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर ले जाने और उसकी सराहना की कोशिश की है। इसमें डीएमके सरकार की नाकामियों की भी बातें होंगी।'
हर विधानसभा से जुटाई गई मिट्टी से बनेगी 'तमिल थाई' की भव्य प्रतिमा
150 दिनों की यह यात्रा राज्य की अधिकतम विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी और इस दौरान प्रत्येक चुनाव क्षेत्रों से मिट्टी जमा की जाएगी। रवि ने बताया है कि जुटाई गई मिट्टी का उपयोग त्रिची में 'तमिल थाई' (तमिल मां) की एक भव्य प्रतिमा के निर्माण में किया जाएगा। मौजूदा लोकसभा में तमिलनाडु से बीजेपी के एक भी सांसद नहीं हैं और पार्टी की कोशिश होगी कि 2024 में वह कुछ सीटें इस दक्षिणी राज्य से भी निकाल लाए।
तेलंगाना में भी सड़कों पर संघर्ष शुरू कर चुकी है भाजपा
भाजपा को इस बार तेलंगाना से भी काफी उम्मीदें हैं। जी किशन रेड्डी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपकर पार्टी ने तेलुगू जातीय समीकरण को सहेजने की भरपूर कोशिश की है। उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है। गुरुवार को वे हैदराबाद के पास एक गांव में गरीबों के लिए बने दो-बेडरूम वाले घरों का मुआयना करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पहले ही हिरासत में ले लिया। पार्टी का आरोप है कि गरीबों के लिए बने इन घरों के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ है।
तमिलनाडु के बाद अमित शाह 29 जुलाई को हैदराबाद भी पहुंचेंगे और कोर कमिटी की बैठकों में शामिल होंगे। हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन काफी शानदार रहा था और तब शाह ने उसमें खुद भी बड़ा जोर लगाया था।












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