कब-कब अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे BJP सांसद निशिकांत दुबे, महिला नेता पर आरोप लगा आए थे सुर्खियों में
Nishikant Dubey: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे को अगर किसी फुटबॉल की टीम में फिट किया जाए तो वो एक अच्छा मिडफील्डर साबित हो सकते हैं, जो अपने प्रतिद्वंद्वी पर निशाना साधने और अपनी पार्टी की रक्षात्मक रेखाओं को संभालने में माहिर है। जिससे पार्टी के पीठ पर दबाव कम होता है। हालांकि इस बार निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर बयान देकर सीमा पार कर ली है।
सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ''देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना "देश में सभी गृहयुद्धों" के लिए जिम्मेदार हैं।'' इस बयान के बाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पार्टी इन टिप्पणियों को "पूरी तरह से खारिज" करती है और इस तरह के बयानों के खिलाफ चेतावनी देती है। जवाब में निशिकांत दुबे ने कहा कि वह "पार्टी के अनुशासित सिपाही" हैं और "पार्टी जो कहती है, वही करेंगे।'' इससे पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने विचारों के बारे में पार्टी से बात नहीं की है। हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब निशिकांत दुबे अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हैं। आइए जानें कब-कब उनके बयान विवादों में रहें?

कब-कब BJP सांसद निशिकांत दुबे ने दिया विवादित बयान?
🔴 बिहार में जन्मे और जनसंघ नेता के भतीजे 56 वर्षीय निशिकांत दुबे ने आरएसएस से बहुत कम उम्र में ही जुड़ाव महसूस किया और इसकी शाखाओं से शुरुआत की। कॉरपोरेट जगत में कुछ समय बिताने के बाद निशिकांत दुबे 2009 में सक्रिय राजनीति में शामिल हुए और झारखंड के गोड्डा से लगातार चार बार लोकसभा के लिए चुने गए।
🔴 लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक, निशिकांत दुबे अक्सर विपक्षी नेताओं पर निशाना साधने में आगे रहे हैं। हाल के सालों में निशिकांत दुबे प्रमुख बहसों के दौरान या विपक्ष पर हमला करने के लिए भाजपा के पसंदीदा नेता रहे हैं।

🔴 सुप्रीम कोर्ट पर बयान देने के बाद अगले ही दिन निशिकांत दुबे ने फिर से विवादित बयान दिया। रविवार 20 अप्रैल को निशिकांत दुबे ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के वक्फ कानून पर दिए गए बयान को लेकर उनको घेरा। सोशल मीडिया एक्स पर निशिकांत दुबे ने लिखा, ''आप चुनाव आयुक्त नहीं, मुस्लिम आयुक्त थे। झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोटर सबसे ज्यादा आपके कार्यकाल में ही बनाया गया। पैगंबर मुहम्मद साहब का इस्लाम भारत में 712 में आया। इसके पहले तो यह जमीन हिंदुओं की या उस आस्था से जुड़ी आदिवासी, जैन या बौद्ध धर्मावलंबी की थी। मेरे गांव विक्रमशिला को बख्तियार खिलजी ने 1189 में जलाया। विक्रमशिला विश्वविद्यालय ने दुनिया को पहला कुलपति दिया अतिश दीपांकर के तौर पर। स देश को जोड़ो, इतिहास पढ़ो, तोड़ने से पाकिस्तान बना, अब बंटवारा नहीं होगा।''
🔴 लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर 2023 की बहस के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में निशिकांत दुबे को आश्चर्यजनक रूप से चुना गया था, जब सभी को उम्मीद थी कि भाजपा अपनी किसी महिला सांसद को मैदान में उतारेगी।
🔴 जब भाजपा ने अपने तत्कालीन लोकसभा सांसद रमेश बिधूड़ी द्वारा साथी सांसद दानिश अली के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कदम उठाया, तो निशिकांत दुबे फिर से पार्टी का बचाव करने में सबसे आगे थे। उस दौरान रमेश बिधूड़ी का बचाव करने को लेकर सुर्खियों में आए थे। उस दौरान उन्होंने कई उदाहरण दिए कि विपक्षी नेताओं ने अप्रिय टिप्पणी की थी।

🔴 जब निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को लिया था आड़े हाथ
कुछ महीने पहले निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया था, जब उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के नेता 2017 में "डोकलाम संकट के दौरान" एक विदेशी शक्ति के प्रतिनिधियों से बात कर रहे थे, चीन का संदर्भ में...पहले तो उन्हें हटा दिया गया था, लेकिन फिर बहाल कर दिया गया था। कांग्रेस ने कहा कि यह कदम अभूतपूर्व और एक असाधारण घटना थी।
इस फरवरी 2025 में निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ आरोप का नेतृत्व किया था, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राहुल गांधी के जवाब ने विवाद को जन्म दिया। निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही की मांग की थी।

🔴 जब TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर निशिकांत दुबे ने लगाया गंभीर आरोप
निशिकांत दुबे सबसे ज्यादा चर्चाओं में तब आए, जब उन्होंने ''कैश फॉर क्वेरी'' मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि महुआ मोइत्रा पैसों के बदले संसद में प्लांटेड सवाल पूछती हैं।
निशिकांत दुबे की डिग्री को लेकर भी विवाद हो चुका है। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने ही आरोप लगाया था कि राजस्थान की प्रताप यूनिवर्सिटी ने निशिकांत दुबे को फर्जी डिग्री दी थी। हालांकि निशिकांत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
🔴 एनआरसी की मांग को लेकर सुर्खियों में रहते हैं निशिकांत दुबे
निशिकांत दुबे झारखंड में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की मांग करने वालों में सबसे मुखर नेताओं में से एक रहे हैं। उनका आरोप है कि बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों के अनियंत्रित प्रवेश से राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहे हैं। पिछले साल उन्होंने लोकसभा के एक सत्र के दौरान कहा था कि बांग्लादेश की सीमा से लगे पड़ोसी पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों को अवैध प्रवासियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाना चाहिए। अवैध प्रवासियों द्वारा झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय विशेषताओं को बदलने की यह कहानी पिछले साल के अंत में झारखंड विधानसभा में भाजपा के लिए एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गई थी।
निशिकांत दुबे ने पिछले महीने मार्च 2025 में कहा था, "यह कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। हमारी पूरी जनसांख्यिकी बदल गई है। झारखंड में आदिवासियों की 45% आबादी 2011 की जनगणना में घटकर 28% रह गई है। अब यह 23-24% होगी। झारखंड आदिवासियों के लिए बना था और वे राज्य में विलुप्त होते जा रहे हैं। कांग्रेस को सिर्फ अपने वोट बैंक की चिंता है। झारखंड में एनआरसी लागू करने का समय आ गया है। फिर बांग्लादेशियों की पहचान करके उन्हें हथकड़ी लगाकर वापस भेजा जाना चाहिए।"












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