VIDEO: बीजेपी सांसद हंसराज हंस ने लोकसभा में पढ़ी ये कविता
नई दिल्ली। बीजेपी के टिकट पर पहली बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हंसराज हंस ने बुधवार को नए अंदाज में अपना पहला भाषण दिया। हंसराज हंस ने शून्यकाल में अपने अंदाज में सभी संसद सदस्यों को आकर्षित करते हुए कहा कि एक कविता पढ़ी। हंसराज ने कहा कि 'जिंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना, पांव बख्शे हैं तौफीके सफर भी देना। गुफ्तगू तूने सिखाई है कि मैं गूँगा था, आज में बोलूँगा तो बातों में असर भी देना।'

इसके बाद हंसराज हंस ने कहा कि उनके लोकसभा क्षेत्र में कई समस्याएं हैं लेकिन उन मुद्दों को किसी और दिन उठाएंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब में उनका जन्म हुआ जहां कहा जाता है कि किसी को मारकर दबा दो तो वह भी जिंदा हो जाता था लेकिन उसे किसी की नजर लग गई। उन्होंने कहा कि आंतकवाद के बाद पंजाब अब नशे से बर्बाद हो रहा है। ऐसे में जवानी को नशे से बचाने के लिए हम सभी को कोशिश करनी चाहिए।
इसके अलावा हंसराज हंस ने गरीबों की समस्या को लेकर भी एक कवित पढ़ी। जिसमें उन्होंने कहा कि चेहरा बता रहा था कि मरा है भूख से, सब लोग कह रहे थे कि कुछ खा के मर गया।' बता दें कि हंसराज हंस नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से सांसद हैं। संसद में उनकी ओर से पढ़ी गई कविता पर कांग्रेस की नेत सोनिया गांधी, राहुल गांधी, जम्मू-कश्मीर के नेता फारुख अब्दुल्ला के अलावा बाकी संदस्यों ने भी टेबल थपथपा कर स्वागत किया।
अपने भाषण के दौरान हंसराज हंस ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी और पूछा कि वहां से सूफी कहां चले गए। 57 साल के हंसराज हंस जो कि एक गायक भी रहे हैं और उन्होंने अपने संगीत कैरियर में लोक गीत, सूफी संगीत और बॉलीवुड फिल्मों के लिए गाना गाया है। इसके अलावा इनको पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया है।
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