आजीवन कारावास की सजा के बाद भाजपा नेता की विधायकी खत्म, अब 12 सीटों पर होगा उपचुनाव
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक कुमार सिंह चंदेल को अपनी विधानसभा सदस्यता से हाथ धोना पड़ा है। तकरीबन 22 वर्ष पुराने मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद अशोक कुमार को बड़ा झटका लगा है, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई। दरअसल 19 अप्रैल को कोर्ट ने 22 साल पुराने हत्याकांड मामले में अशोक कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई।

22 साल पुराना मामला
आपको बता दें कि हत्या का यह मामला 1997 का है, जिसमे कोर्ट ने अशोक कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके बाद 19 अप्रैल से अशोक कुमार की विधानसभा की सदस्यता को रद्द माना जाएगा। हाई कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने इस मामले में अपनी सभी औपचारिकताएं पूरी की जिसके बाद विधानसभा सचिवालय को इस मामले में आगे की कार्रवाई करने को कहा गया। चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को अशोक कुमार की सदस्यता को निरस्त कर दिया, जिसके बाद अब हमीरपुर की विधानसभा सीट को रिक्त माना जाएगा।

चुनाव आयोग ने दिया निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल वेंकटेश्वर लू ने विधानसभा के प्रमुख सचिव और प्रमुख गृह सचिव को पत्र लिखकर मांग की थी कि अशोक कुमार सिंह चंदेल की विधानसभा सदस्यता को रद्द किया जाएगा। जिसपर कार्रवाई करते हुए गुरुवार को विधानसभा ने अशोक कुमार की विधानसभा सदस्यता को रद्द कर दिया। विधानसभा सचिव के इस फैसले के बाद अब हमीरपुर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव संपन्न कराए जाएंगे। बता दें कि कुल 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

इन सीटों पर होगा उपचुनाव
दरअसल लोकसभा चुनाव में 11 विधायकों ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की, जिसके बाद इन तमाम विधायकों की सीटें खाली हो गई हैं। लिहाजा इन सभी सीटों पर उपचुनाव कराए जाएंगे। जो सीटें खाली हुई हैं उसमे गंगोह, इगलास, टुंडला, प्रतापगढ़, गोविंदनगर, मानिकपुर, जैदपुर, लखनऊ कैंट, बहराई की बलहा, हमीरपुर सीटें हैं।

क्या है मामला
बता दें कि 26 जनवरी 1997 को शाम करीब सात बजे हमीरपुर के सुभाष नगर इलाके में राजीव शुक्ल के भाइयों राजेश शुक्ल, राकेश शुक्ल, अंबुज, श्रीकात पांडेय और वेदप्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद राजीव शुक्ल ने रात तकरीबन 9 बजे विधायक अशोक सिंह के साथ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। 17 जुलाई 2002 को कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद अशोक कुमार ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।












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