282 से 271 सीटों में पहुंच गई बीजेपी, केंद्र सरकार अब सहयोगियों के भरोसे

नई दिल्ली। गोंदिया और कैराना की लोकसभा सीटों की हार ने बीजेपी के लिए लोकसभा का गणित भी बिगाड़ दिया है। अब वह सत्ता में तो है पर गठबंधन के बूते। 2014 के चुनावों में अकेले दम 282 सीटें लाने वाली बीजेपी की सदन में संख्या 271 ही बची है। सत्ता में पहली बार अपने बूते आने वाली बीजेपी अगला लोकसभा चुनाव आते-आते सहयोगियों के भरोसे हो गई है। हालांकि सरकार पर कोई संकट नहीं है।

गोंदिया और कैराना की लोकसभा सीटों की हार ने बीजेपी के लिए लोकसभा का गणित भी बिगाड दिया है। अब वह सत्ता में तो है पर गठबंधन के बूते। 2014 के चुनावों में अकेले दम 282 सीटें लानी वाली बीजेपी की सदन में संख्या 271 ही बची है। सत्ता में पहली बार अपने आने वाली बीजेपी अगला लोकसभा चुनाव आते- आते सहयोगियों के भरोसे हो गई है। हालांकि सरकार पर कोई संकट नहीं है।

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से अब तक लोकसभा की 27 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। इनमें 13 सीटें बीजेपी के सांसदों की थीं। बाकी 14 सीटें अन्य पार्टियों की। अपनी 13 सीटों में से बीजेपी सिर्फ 5 सीटें ही बचा पाई है। वह कोई अन्य लोकसभा सीट दूसरी पार्टी से नहीं जीत पाई है। अपनी 13 में से 8 सीट गंवाने के बाद बीजेपी 282 सीटों से घटकर 274 सीटों पर पहुंच गई है।

कर्नाटक के चुनावों के बाद दो और बीजेपी सांसदों बीएस येदियुरप्पा और बी श्रीरामुलू ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था। बेल्लारी और शिमोगा की इन सीटों पर अभी उपचुनाव नहीं हुए हैं। 31 मई को उपचुनाव के परिणाम आने के बाद बीजेपी सांसदों की संख्या सदन में 272 रह गई है। पार्टी विरोधी नीतियों के चलते बीजेपी ने कीर्ति आजाद को पार्टी से निकाल तो दिया है लेकिन उन्होंने लोकसभा इसे इस्तीफा नहीं दिया है। तो इस तरह ये संख्या 271 तक पहुंच जाती है। यानी कि बहुमत के आंकड़े से एक कम।

पहली बार अपने बूते पर सत्ता में आने वाली बीजेपी आने वाले आम चुनावों के पहले ही इस बात का मनोवैज्ञानिक लाभ गवां चुकी है कि वह अपने बूते सत्ता में है। 271 सांसद हो जाने के बाद भी पार्टी को कोई खतरा नहीं है लेकिन बचे हुए समय के लिए सहयोगी दलों पर आश्रित जरुर हो गई है।अभी भी आम चुनावों में एक साल का समय बाकी है और उसके सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना के उसका साथ छोड़ने के संकेत मिल रहे हैं। 2014 के चुनावों के बाद बीजेपी ने एक के बाद एक कई राज्यों में अपनी सरकारें बनाईं लेकिन लोकसभा सीट के मामले में जीत के समीकरण वैसे नहीं रह सके।

हुए कुल 27 उपचुनाव

2014 के लोकसभा के चुनाव परिणाम आने के बाद कुल 27 उपचुनाव हुए। इनमें से 13 सीटों पर चुनाव बीजेपी के सेटिंग सांसदों से छूटी हुई सीट पर हुए। इन 13सीटों में से 8 उसके पास से निकल गईं। 2014 में बडोदरा और वीड के उपचुनावों में बीजेपी को जीत मिली थी। बड़ोदरा की सीट तो खुद नरेंद्र मोदी ने खाली की थी। इसके बाद 2015 में बीजेपी ने शहडोल और लखीमपुर सीटें जीती थीं। 2016 के बाद से जितने भी लोकसभा के उपचुनाव हुए हैं उसमें बीजेपी को लगातार हार मिली है। यूपी के विधानसभा चुनावों में बीजेपी प्रचंड बहुमत से जीती थी। इस चुनावों के बाद हुए गोरखपुर, फूलपुर और कैराना के उपचुनावों में बीजेपी को हार का सामना करना पडा। ये तीनों ही सीटें अलग- अलग वजहों से बीजेपी के लिए नाक का सवाल बन हुई थीं।

इस तरह से बीजेपी नहीं बचा पाई अपनी ही सीटें

2018 में

कैराना- भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह सिंह को आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने हराया।

भंडारा-गोदिया- बीजेपी प्रत्याशी हेमंत पाटले कांग्रेस-एनसीपी के संयुक्त प्रत्याशी मधुकर कुकड़े से हारे।

गोरखपुर- योगी आदित्यानाथ के सीएम बन जाने की वजह से हुई थी खाली, उपचुनावों में सपा ने सीट जीती।

फूलपूर- उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के इस्तीफे देने की वजह से हुई खाली, बीजेपी की हार हुई।

अजमेर- अजमेर में कांग्रेस के रघु शर्मा ने बीजेपी के रामस्वरूप लांबा को हराया।

अलवर - अलवर से कांग्रेस करण सिंह यादव ने भाजपा के जसवंत सिंह यादव को हराया।

2017 में

गुरुदासपुर- कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने बीजेपी के सवर्ण सलारिया को हराया।

2015 में

रतलाम- कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने बीजेपी के निर्मल भूरिया को हराया।

सिर्फ ये सीटें बचा पाई बीजेपी

अपनी 13 सीटों में से बीजेपी 5 सीटें बचा पाई। आज आए परिणामों में बीजेपी ने अपनी महाराष्ट्र की अपनी पालघर सीट बचा ली है। ये सीट बीजेपी सांसद के निधन से खाली हुई थी। इसके पहले उसकी आखिरी जीत 2015 के उपचुनावों में हुई थी। इस साल बीजेपी ने शहडोल और लखीमपुर सीटें जीती थीं। 2014 में बड़ोदरा और वीड के उपचुनावों में बीजेपी को जीत मिली थी। बडोदरा की सीट तो खुद नरेंद्र मोदी ने खाली की थी।

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