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अब लोकसभा के डिप्टी स्पीकर पोस्ट पर नजर, भाजपा जेडीयू को दे सकती है ऑफर

नई दिल्ली- ओम बिड़ला के सर्व सहमति से लोकसभा स्पीकर बनने के बाद अब चर्चा डिप्टी स्पीकर के लिए तेज हो चुकी है। तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह किसका नाम आगे करके चौंका देंगे, यह अनुमान लगाना भी मुश्किल है। वैसे आमतौर पर सरकार से बाहर के किसी सांसद को ही यह पद देने की परंपरा रही है। लेकिन, इसबार एनडीए के पास इतना ज्यादा बहुमत है कि खुद उसी के सहयोगी भी इस पद पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इसबार यह पद जेडीयू के खाते में जा सकता है।

जेडीयू को मनाने का मौका

जेडीयू को मनाने का मौका

30 मई को मोदी सरकार में शामिल नहीं होने की घोषणा करके नीतीश कुमार की जेडीयू ने सबको चौंका दिया था। बिहार में वह बीजेपी के साथ सरकार चला रही है और इस लोकसभा चुनाव में वहां एनडीए ने 40 में से 39 सीटें जीती हैं, जिनमें से 16 जेडीयू के खाते में गई हैं। बीजेपी सूत्रों से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी लोकसभा में डिप्टी स्पीकर के पोस्ट का ऑफर जेडीयू को दे सकती है, क्योंकि वह सरकार में शामिल नहीं हुई है। परंपरा भी यही है कि सत्ता में शामिल दल के सदस्य को डिप्टी स्पीकर नहीं बनाया जाता है। 2014 में इसी परंपरा के तहत बीजेपी ने एआईएडीएम को यह पद दिया था और एम थंबीदुरई लोकसभा के डिप्टी स्पीकर बने थे। अलबत्ता पिछले चुनाव तक वह पार्टी बीजेपी की सहयोगी बन गई और दोनों ने लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा। इस तर्क के हिसाब से इस पद के लिए जेडीयू का नाम फिट बैठता है।

बीजेडी की भी है चर्चा

बीजेडी की भी है चर्चा

खबरें हैं कि बीजेपी की ओर से जगह मोहन रेड्डी की पार्टी वाईआरएसपी को डिप्टी स्पीकर का पद ऑफर किया गया था, लेकिन उसने इसके लिए एक शर्त लगा दी। पार्टी का कहना है कि वह डिप्टी स्पीकर का पद लेकर सरकार के साथ खड़े दिखना नहीं चाहती। जगन की पार्टी ने साफ किया है कि जब तक आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक वह सत्ताधारी दल के साथ नहीं खड़ी होगी। सांसदों के लिहाज से भी कांग्रेस के बाद वाईआरएसपी और टीएमसी के पास ही सबसे ज्यादा 22-22 सांसद हैं। लेकिन, वाईआरएसपी के ना कहने पर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के सामने बीजेडी भी एक विकल्प हो सकती है, जिसके पास मौजूदा लोकसभा में 12 सांसद हैं। यह पार्टी भी बीजेपी के साथ सरकार में नहीं है। लेकिन, बीजेपी के सामने बीजेडी के नाम पर एक ये दिक्कत हो सकती है कि केंद्र में भले ही वह मोदी सरकार की कट्टर विरोधी नहीं हो, परन्तु ओडिशा में जमीनी लड़ाई में दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं।

शिवसेना पहले ही ठोक चुकी है दावा

शिवसेना पहले ही ठोक चुकी है दावा

शिवसेना मोदी सरकार में शामिल है, इसलिए उसे डिप्टी स्पीकर का पद देना निर्धारित मान्यताओं के खिलाफ माना जा सकता है। लेकिन, शिवसेना एनडीए में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने की दलील देकर इस पद के लिए अपना दावा ठोक चुकी है। पार्टी नेता संजय राउत साफ कह चुके हैं कि इस पद की कोई मांग नहीं है, बल्कि एनडीए में दूसरे बड़े दल होने के नाते उनका ये हक है। गौरतलब है कि सत्ताधारी गठबंधन में बीजेपी के 303 सांसदों के बाद सबसे ज्यादा 18 सांसद शिवसेना के पास ही हैं। जबकि, जेडीयू के पास 16 सांसद हैं, अलबत्ता सरकार में उसके कोई मंत्री नहीं हैं। इसलिए जेडीयू के चांस ज्यादा सुनहरे दिखाई दे रहे हैं।

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