यूपी में बीजेपी ने आखिरी 48 घंटो के लिए बनाई खास रणनीति, 50 सीटों से अधिक जीतने का दावा

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सपा-बसपा और आरएलडी के महागठबंधन से उत्तर प्रदेश में काफी तगड़ी टक्कर मिल रही है। इसी को देखते हुए बीजेपी यूपी में अपना 2014 का प्रदर्शन दोहराने के लिए बूथ मैनजमेंट लेवल पर कड़ी मेहनत कर ररी है। पूर्वी यूपी की 14 और 13 सीटों पर आखिरी दो चरणों में मतदान है। यहां 12 मई को पांचवे चरण में और 19 मई को आखिरी चरण में वोटिंग होगी। साल 2014 में अपना दल के साथ मिलकर बीजेपी ने लगभग सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी।

'महागठबंधन ने दी बीजेपी की चुनौती'

'महागठबंधन ने दी बीजेपी की चुनौती'

इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने स्वीकार किया है बीएसपी-एसपी-आरएलडी का गठबंधन बीजेपी को यूपी में वास्तविक चुनौती दे रहा है। उन्होंने कहा कि वोटिंग से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं का आखिरी 48 घंटे का बूथ मैनजमेंट, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सद्भावना को वोटों में तब्दील करेगा। वो इस चुनाव में अंतिम चरण की वोटिंग से पहले मील का पत्थर साबित होगा।

'48 घंटे के बूथ मैनजमेंट पर फोकस'

'48 घंटे के बूथ मैनजमेंट पर फोकस'

बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी मतदान से पहले 48 घंटे के बूथ मैनजमेंट को एक प्रक्रिया के रूप में देखती है, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता आखिरी दो दिनों के चुनाव प्रचार पर फोकस करती है जो वोटिंग से दो दिन पहले और चुनाव प्रचार खत्म होने के दिन होता है। इस कार्यक्रम के तहत हर पार्टी के कार्यकर्ता को एक कागज की सीट जिसे 'परिवार पर्ची' कहा जाता है, सौंपते हैं। इसमें उसके इलाके में आने वाले परिवारों के मुखिया के नाम शामिल होते हैं। कार्यकर्ता इन परिवारों से संपर्क कर उन्हें मतदान के दिन वोटिंग के बारे में याद दिलाता है। पार्टी कार्यकर्ता इन लोगों को बुलाता है और सोशल मीडिया के जरिए भी इनके संपर्क में रहता है।

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'मोदी और बीजेपी को 60 फीसदी सपोर्ट'

'मोदी और बीजेपी को 60 फीसदी सपोर्ट'

बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के आकलन के मुताबिक ग्राउंड पर 60 फीसदी समर्थन पीएम मोदी और बीजेपी के साथ है। इस समर्थन को वोटों में बदलने के लिए कैसे मतदानों को बूथ पर लाया जाए, आखिर में ये ही महत्वपूर्ण होगा। पार्टी के सीनियर नेता ने कहा कि नेतृत्व को लगता है कि ये ऐसे परिदृश्य में जहां जीत के अंतर को कम किया जा सकता है। वहीं पार्टी की संगठनात्मक ताकत ग्राउंट सपोर्ट को वोटों में तब्दील करने में ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने आगे कहा कि यूपी में पूरी ताकत से लड़े गए चुनाव ने ये साबित कर दिया है कि नेता(मोदी) की 'न्यू बीजेपी' है।

'अटल आडवाणी की बीजेपी नहीं'

'अटल आडवाणी की बीजेपी नहीं'

ये अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी वाली बीजेपी नहीं है। मोदी और शाह के पास चुनावों के लिए एक अलग दृष्टिकोण है। वे हर लड़ाई को एक युद्ध की तरह लड़ते हैं। उन्होंने कुछ भी नहीं छोड़ा और अंतिम क्षण तक हार नहीं मानी। दोनों नेता बीजेपी में एक नया रवैया लेकर आए है और नया माहौल केवल सफलता को देखने के लिए है।

'बीजेपी 50 सीटों के आकंड़े को पार करेगी'

'बीजेपी 50 सीटों के आकंड़े को पार करेगी'

बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की टीम समेत शाह हर रोज यूपी की स्थिति में नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि जब पार्टी के चुनाव अभियान का आगाज हुआ तब पार्टी ने 30 सीटों पर जीत निश्चित की थी क्योंकि हम सपा-बसपा से मिलने वाली चुनौती से अवगत थे। लेकिन चीजें हर दिन सुधर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले आकलन के मुताबिक बीजेपी यूपी में आसानी से 50 सीटों के आंकड़े को पार कर लेगी। हर निवार्चन क्षेत्र के अलग रणनीति बनाई गई है। इसमें जातिगत समीकरण, राष्ट्रवाद या सांप्रदायिक धुव्रीकरण है।

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