कर्नाटक उपचुनाव में हार के बाद 'टेंशन में BJP', 282 से घटकर इतनी हुईं लोकसभा सीटें
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली 282 सीटों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
नई दिल्ली। कर्नाटक में तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इन पांच सीटों में से भाजपा को केवल एक लोकसभा सीट पर जीत हासिल हुई है, जबकि बाकी चार सीटों पर कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन ने जीत का परचम लहराया है। कर्नाटक उपचुनाव में पार्टी के दिग्गज नेता श्रीरामलू की सीट भी भाजपा नहीं बचा सकी और उसे हार का सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनावों में अभी तक भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और पार्टी को मिली 282 सीटों की संख्या लगातार घटती जा रही है।

282 से घटकर 272 पर आई भाजपा
कर्नाटक में तीन लोकसभा सीटों- शिमोगा, मंड्या और बेल्लारी पर उपचुनाव हुआ था। इनमें से शिमोगा और बेल्लारी सीट पर भाजपा का कब्जा था, जबकि मंड्या सीट जेडीएस के खाते में थी। उपचुनाव के परिणामों में भाजपा केवल शिमोगा सीट ही बचा सकी, जहां से पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई राघवेंद्र येदियुरप्पा चुनाव लड़े थे। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने ना केवल मंड्या सीट पर जीत हासिल की, बल्कि भाजपा के खाते से बेल्लारी सीट पर छीन ली। इस हार के साथ ही लोकसभा में भाजपा के सांसदों की संख्या 282 से घटकर 272 रह गई है।

अभी तक कौन-कौन सी सीटें गंवा चुकी है भाजपा
इससे पहले हाल ही में यूपी में हुए उपचुनावों में भाजपा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ गोरखपुर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की लोकसभा सीट फूलपुर और केंद्रीय मंत्री रहे सांसद हुकुम सिंह की सीट कैराना पर हार का सामना करना पड़ा था। यूपी के अलावा महाराष्ट्र की भंडारा गोंदिया लोकसभा सीट, राजस्थान की अलवर और अजमेर लोकसभा सीट, पंजाब की गुरदासपुर सीट और मध्य प्रदेश की रतलाम लोकसभा सीट भी भाजपा हार चुकी है। आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद कुल 30 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं।

उपचुनावों में गिरता प्रदर्शन बना टेंशन
आपको यह भी बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इन पांचों राज्यों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इन तीनों ही राज्यों में वर्तमान में भाजपा की सरकार है और पार्टी अपनी सत्ता कायम रखने के लिए जोरशोर से प्रचार में जुटी है। वहीं, कांग्रेस भी भाजपा की सत्ता विरोधी लहर के बलबूते तीनों राज्यों में वापसी के लिए जोर आजमाइश कर रही है। ऐसे में उपचुनावों में भाजपा का लगातार गिरता प्रदर्शन उसके लिए चिंता का विषय बना हुआ है।












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