दक्षिण भारत की ओर बढ़ा भाजपा का रथ, 5 राज्यों पर नजर
दक्षिण भारत में अपनी पैठ को बढ़ाने के लिए भाजपा ने बनाया ब्लूप्रिंट, इन पांच राज्यों पर पार्टी की नजर
नई दिल्ली। देशभर के कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी अपने पैर पसारती जा रही है, लेकिन अब पार्टी दक्षिण भारत के पांच अहम राज्यों में अपनी पैठ बनाने की कवायद में जुट गई है। पीएम मोदी की अपील और आरएसएस की मदद से पार्टी इस अभियान के लिए योजना बनाने में जुट गई है। दक्षिण भारत के पांच अहम राज्यों में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इसके लिए ब्लूप्रिंट भी बना लिया है।

अमित शाह ने बनाया ब्लू प्रिंट
सूत्रों की मानें तो अमित शाह ने दक्षिण भारत के पांच अहम राज्य आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक के लिए अपना खाका पार्टी के नेताओं के सामने रखा है। इन सभी राज्यों में पिछले कुछ सालों में आरएसएस ने अपनी पकड़ को काफी मजबूत किया है, जिसके दम पर पार्टी अपनी स्थिति को यहां मजबूत करने के लिए मैदान में उतरेगी। इस साल के अंत में कर्नाटक में होने वाले चुनाव में पार्टी की साउथ मिशन की अग्निपरीक्षा होगी।

तमिलनाडु में AIADMK- DMK के खिलाफ भाजपा की रणनिति
तमिलनाडु में कुल 231 सीटें हैं लेकिन भाजपा के पास एक भी सीट नहीं है, वहीं यहां कुल 39 लोकसभा सीटें हैं जिसमे से भाजपा के खाते में 1 सीट आई है। यहां 2021 में अगला विधानसभा चुनाव होगा।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव पी मुरलीधर राव का कहना है कि तमिलनाडु में भाजपा के लिए बड़ा मौका है, यहा एआईएडीएमके के भीतर चल रही तनातनी के बीच पार्टी के पास बड़ा मौका है कि वह अपनी पैठ को मजबूत कर सके। डीएमके इस स्थिति में यहां अभी नहीं है कि वह लोगों का विश्वास जीत सके। पिछले कई दशक से यहां इन दोनों दलों का शासन प्रदेश के लोग देख चुके हैं। मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है और एमके स्टालिन इसके खिलाफ अपनी आवाज भी नहीं उठा रहे हैं। पार्टी यहां राष्ट्रपति चुनाव से पहले किसी भी तरह की गतिविधि से बचना चाहती है क्योंकि वह राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एकजुट एआईएडीएमके का साथ चाहती है।

फिल्म स्टार्स पर नजर
तमिलनाडु में फिल्म स्टार को पार्टी में शामिल करके भाजपा खुद को यहां लोकप्रिय करने की कोशिश करेगी। यहां जिस तरह से फिल्मी कलाकार चुनावी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं उसे देखते हुए भाजपा इसके लिए अपनी अहम योजना बना रही है। हाल ही में पीएम मोदी से रजनीकांत ने मुलाकात की है, यही नहीं उपचुनाव के दौरान रजनीकांत ने स्थानीय भाजपा उम्मीदवार से मुलाकात भी की थी। सूत्रों की मानें तो विशाल और विजय को भी पार्टी में शामिल करने की कोशिशें चल रही हैं।

केरल में डूबती कांग्रेस के सहारे भाजपा
केरल में कुल 140 विधानसभा की सीटें हैं, जिसमें से भाजपा के खाते में सिर्फ एक सीट है, यहां लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं लेकिन भाजपा के पास एक भी सांसद यहां नहीं है। यहां अगला विधानसभा चुनाव 2021 में होना है।
वहीं अगर केरल की बात करें तो जिस तरह से देशभर में कांग्रेस की स्थिति खराब हो रही है उसका फायदा भाजपा उठाने की कोशिश करेगी। यहां सत्तारूढ सीपीआईए और एलडीएफ के बीच चल रहे मतभेद को देखते हुए पार्टी की स्थिति मजबूत है। राव का कहना है कि अल्पसंख्यक और स्थानीय कमजोरी अब पार्टी के लिए मुश्किल नहीं है। जिस तरह से कांग्रेस कमजोर हो रही है उसे देखते हुए भाजपा यहां चुनाव में अहम किरदार के रुप में उभरेगी। पार्टी में फिल्म एक्टर को लाने की पार्टी की योजना के बारे में राव ने बताया कि सुरेश गोपी पहले ही राज्यसभा सदस्य हैं, जबकि मोहनलाल को भी पार्टी में लाने की कोशिशों में भाजपा जुटी है।

तेलंगाना में टीआरएस के खिलाफ भाजपा की रणनीति
तेलंगाना में कुल 119 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से भाजपा के पास 5 सीटें हैं, जबकि यहां लोकसभा की कुल 17 सीटें हैं जिसमें से भाजपा के पास सिर्फ 1 सीट है।
तेलंगाना में भाजपा के नेता का कहना है कि टीआरएस के खिलाफ लोगों के गुस्से का कांग्रेस फायदा उठाने में पूरी तरह से विफल है, क्योंकि दोनों ही दल एक ही तरह की राजनीति करते हैं। जिस तरह से कांग्रेस के कई नेता और विधायक पहले ही टीआरएस में शामलि हो गए हैं उसकी वजह से यहां कांग्रेस पहले ही काफी कमजोर हो चुकी है। ऐसे में विपक्ष की जगह को भाजपा पूरा कर सकती है। भापा ने पहले ही यहां तेलंगाना सरकार के खिलाफ पिछड़े मुस्लिमों को आरक्षण में बढ़ोत्तरी के मामले पर घेरना शुरु कर दिया है।

आंध्र प्रदेश में भाजपा का दांव
आंध्र प्रदेश विधानसभा में कुल 175 सीटें हैं जिसमें भाजपा के 4 विधायक हैं, लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं जिसमें से भाजपा के पास 2 सीटें हैं। यहां 2019 में अगला विधानसभा चुनाव होगा।
आंध्र प्रदेश में भाजपा टीडीपी के साथ गठबंधन में सरकार में है। ऐसे में पार्टी यहां खुद को मजबूत करके टीडीपी के साथ अहम भूमिका में खुद को स्थापित करने की कोशिश करेगी। मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी आय से अधिक संपत्ति के मामले में पहले ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा का मानना है कि जबतक जगन इन आरोपों से बाहर निकलेंगे तबतक उनके लिए काफी देर हो चुकी होगी। यहां दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी से हाल ही में मुलाकात के बाद जगन ने कहा था कि वह राष्ट्रपति चुनाव में उनका साथ देंगे। आंध्र प्रदेश में भाजपा पूर्व कांग्रेस नेताओं को भी अपने साथ लाने की कोशिश करेगी जिन्होंने वाईएसआर कांग्रेस का दामन नहीं थामा है।

कर्नाटक में सत्ता गंवा सकती है कांग्रेस
कर्नाटक में कुल में 224 विधानसभा की सीटें हैं जिसमें से भाजपा के पास कुल 44 सीटें हैं, जबकि लोकसभा की कुल 28 सीटों में से भाजपा के खाते में 17 सीटें हैं। यहां अगला विधानसभा चुनाव इसी वर्ष के अंत में होना है। देशभर में जिस तरह से कांग्रेस लगातार हार का सामना कर रही है उसे देखते हुए कर्नाटक में भाजपा खुद को मजबूत करने की पूरी कोशिश करेगी और एक बार फिर से सत्ता में वापसी करेगी। इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले ही कांग्रेस में अभी से विवाद शुरु हो गया है, ऐसे में कांग्रेस के लिए यहां खुद को बचाने की बड़ी चुनौती है।












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