West Bengal rural elections: बीजेपी ने पलट दिए सारे आंकड़े, उतारे 850 मुस्लिम उम्मीदवार
कोलकाता। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में बीजेपी ने रिकॉर्ड 850 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। पश्चिम बंगाल में 14 मई को पंचायत चुनावों के लिए मतदान होना है। बीजेपी के लिए यह कितना बड़ा रणनीतिक बदलाव है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2013 के पंचायत चुनाव में बीजेपी ने सिर्फ 100 मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव लगाया था।

बीजेपी की प्रदेश इकाई के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अली हुसैन ने पार्टी की रणनीति में हुए बदलाव के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में हमें अल्पसंख्यक समुदाय तक संपर्क कायम करना ही होगा, क्योंकि यहां 30 फीसदी आबादी मुस्लिम है। उन्होंने कहा कि तृणमूल और अन्य दल मुस्लिम समुदाय को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन मुस्लिम अब समझ चुके हैं कि बीजेपी उनकी शत्रु नहीं है।
इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम नेताओं को टिकट देने का बचाव करते हुए बीजेपी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष नेता दिलीप घोष ने अमित शाह और नरेंद्र मोदी की उस लाइन को दोहराया है, जिसमें वे 'जीतने की क्षमता' को टिकट देने के पीछे आधार बताते रहे हैं। गुजरात में मुस्लिमों को टिकट कम दिए जाने पर एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा था कि टिकट धर्म या जाति नहीं बल्कि इस आधार पर दिया जाता है कि कौन जीत सकता है या कौन नहीं?
ऐसा माना जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने की बीजेपी की रणनीति के पीछे जो शख्स काम कर रहा है, उसका नाम है- मुकुल रॉय। तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने वाले मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति पर अच्छी खासी पकड़ रखते हैं। वह ममता बैनर्जी के बेहद करीब थे और अब बीजेपी में आने के बाद तृणमूल के ही हथियार को इस्तेमाल कर चुनावी मैदान में कूदे हैं।
आपको बता दें कि 2016 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 उम्मीदवारों उतारे थे, जिनमें केवल छह उम्मीदवार ही मुस्लिम थे।












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