BJD ने सांसद वैजयंत पांडा से की इस्तीफे की मांग, कहा-चुनाव शपथ पत्र में दी थी गलत जानकारी
ओडिशा। बीजू जनता दल (बीजेडी) से हाल ही निलंबित किए गए केंद्रपाड़ा से लोकसभा सांसद बैजयंत पांडा से पार्टी ने लोकसभा से इस्तीफा देने की मांग की है। बैजयंत पांडा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया था और उन पर चुनाव आयोग को शपथ पत्र में भी गलत जानकारी देने का आरोप है। आरोपों के निराधार बताते हुए पांडा ने कहा कि, ऐसा बिलकुल नहीं हैं, यह आरोप एकदम गलत है, मुझे साजिशन बदनाम करने की कोशिश की जा रहे है। ओडिशा में खराब लॉ एंड ऑर्डर की समस्या से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

हलफनामे में दी गलत जानकारी
केंद्रपाडा के सांसद ने कहा कि, जो कोई भी मेरे इलेक्शन में दाखिल किए गए शपथ पत्र को चुनाव आयोग या कोर्ट में उठाएगा मैं उसका स्वागत करुंगा। पार्टी ने आरोप लगाया है कि 2014 के चुनाव में उनके चुनाव हलफनामे में, पांडा ने यह खुलासा नहीं किया था कि वह एक खनन कंपनी इंडियन मेटल्स और फेरो अलॉयज लिमिटेड के उपाध्यक्ष हैं और वहां से वेतन ले रहे हैं। पांडा ने पत्रकारों को बताया, मेरे खिलाफ आरोप पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है। साल 2009 और 2014 में पांडा लोकसभा के लिए चुने गए जबकि 2000 से 2009 तक राज्यसभा सदस्य रहे।

हर साल ले रहे थे करोडों वेतन
बीजेडी उपाध्यक्ष वेदप्रकाश अग्रवाल ने कहा, तथ्य यह है कि वह एक वेतनमान कर्मचारी हैं और आईएमएफए में उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं, 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने नामांकन पत्र में दाकिल किए गए हलफनामे में पांडा ने इस जानकारी को छुपाया था। पार्टी ने आरोप लगाया है कि पांडा ने पिछले कुछ सालों में आईएमएफए के उपाध्यक्ष के रूप में वार्षिक वेतन और भत्ते के तौर पर 2 करोड़ रुपये, 79 लाख रुपये, 1.45 करोड़ रुपये, 1.60 करोड़ रुपये और 7.66 करोड़ रुपये की कमाई की है।

पार्टी के खिलाफ उठाई थी आवाज
पांडा ने कहा कि, नवीन पटनायक जी यह काफी दुख की बात है कि आपने मेरे खिलाफ हो रही साजिश को नहीं देख सके जो एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में की जा रही थी। मैं पार्टी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करता हूं। बैजयंत पांडा ने कुछ समय पहले ही अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पांडा की सांसद निधि से कराए गए विकास कार्यों को क्षतिग्रस्त किया था। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2017 में अपनी पार्टी की ओर से बुलाई गई हड़ताल से खुद को अलग कर लिया था।












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