Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

क्यों सुर्खियों में है 50 रुपये वाली सबसे सस्ती देसी वैक्सीन? 1,500 करोड़ रुपये एडवांस देगी सरकार

नई दिल्ली, 4 जून: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में कोरोना वैक्सीन की भारी मांग के मद्देनजर एक और देसी वैक्सीन 'कोर्बेवैक्स' की 30 करोड़ डोज बुक करा दी है। हैदराबाद स्थित भारत की बड़ी फार्मा कंपनी बायोलॉजिकल ई की रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन 'कोर्बेवैक्स' का इंसान पर होने वाला फेज-3 ट्रायल अभी पूरा भी नहीं हुआ है। लेकिन, फिर भी केंद्र सरकार ने कंपनी को 1,500 करोड़ रुपये की एडवांस पेमेंट देकर 30 करोड़ डोज रिजर्व करने का फैसला किया है। इस तरह एक डोज की कीमत सिर्फ 50 रुपये पड़ेगी और यह सबसे सस्ती है। सवाल है कि बिना ट्रायल पूरा हुए सरकार इतना बड़ा जोखिम क्यों ले रही है और यह वैक्सीन किस तरह से काम करेगी इसको लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है।

किसकी साझेदारी से तैयार हो रही है बायोलॉजिकल-ई वैक्‍सीन ?

किसकी साझेदारी से तैयार हो रही है बायोलॉजिकल-ई वैक्‍सीन ?

बायोलॉजिकल ई की 'कोर्बेवैक्स' वैक्सीन अमेरिका के टेक्सास स्थित बेलॉर कॉलेज ऑफ मेडिसीन के साथ साझेदारी में विकसित की जा रही है। बायोलॉजिकल ई लिमिटेड इसका निर्माण इस साल अगस्त से सितंबर के बीच भारत में ही करेगी और यहीं पर इसका स्टॉक रखा जाएगा। कंपनी के इसी प्रस्ताव पर सरकार ने उसे 1,500 करोड़ रुपये एडवांस देने की बात कही है। कंपनी को उम्मीद है कि ड्रग रेगुलेटर से इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिलने का बाद वह हर महीने इसकी 7.5 से 8 करोड़ डोज तैयार कर लेगी। वैक्सीन पर बने नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ने इस कंपनी के दावों को परखा है, उसके बाद सरकर ने इसपर आगे बढ़ने की बात कही है। शुरुआती स्टडी में भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग भी अपने रिसर्च इंस्टीट्यूट ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस टेक्नोलॉजी के जरिए इसके साथ भागीदारी कर चुका है।

Recommended Video

    Covid Vaccination: Modi Govt का Biological-E से करार, खरीदेगी 30 करोड़ वैक्सीन डोज | वनइंडिया हिंदी
    किस तरह काम करती है बायो ई वैक्सीन ?

    किस तरह काम करती है बायो ई वैक्सीन ?

    स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 'कोर्बेवैक्स' एक आरबीडी (रिसेप्‍टर-बाइंडिंग डोमेन) प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन है। इसमें कोरोना वायरस के आरबीडी के डिमेरिक फॉर्म का एंटीजन (स्पाइक प्रोटीन) की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इस वैक्सीन का प्रभाव बढ़ाने के लिए इसमें एडजुवेंट (सहयाक) सीपीजी 1018 टीएम का भी इस्तेमाल हुआ है। इसके जरिए वायरस के एक खास हिस्से को टारगेट किया जाता है। इस वैक्सीन का हेपेटाइटिस बी जैसे वायरस के खिलाफ रोग-प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने के लिए पहले से ही उपयोग किया जाता रहा है। इस वैक्सीन की भी दो डोज लगाई जाएगी और कोवैक्सिन की तरह ही दोनों डोज में 28 दिन का ही अंतर रखना होगा।

    क्या थर्ड फेज ट्रायल से पहले एडवांस पमेंट सही है ?

    क्या थर्ड फेज ट्रायल से पहले एडवांस पमेंट सही है ?

    बायोलॉजिकल ई को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से पिछले 24 अप्रैल को फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी मिली थी, लेकिन उसके पास इससे पहले की एफिकेसी का डेटा मौजूद नहीं है। सरकार का कहना है कि फेज-1 और फेज-2 के ट्रायल के नतीजे बेहतर रहे हैं। हालांकि, कंपनी अभी तक उन ट्रायल के डेटा को किसी भी प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित नहीं करवा सकी है। ऐसे में कुछ एक्सपर्ट इससे पहले स्टॉक जुटाने और सरकार की ओर से एडवांस पेमेंट देने को जोखिम वाला सौदा बता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर प्रोटीन सब-यूनिट अच्छे से काम करता है तब तो दूसरी वैक्सीन की तुलना में इसका जल्द निर्माण करना आसान है। जाने-माने वायरोलॉजिस्ट और सीएमसी वेल्लोर के प्रोफेसर डॉक्ट गगनदीप कंग ने मनी कंट्रोल से कहा है- 'समय को देखते हुए सरकार ने थोड़ा जोखिम लिया है।......प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन को लेकर मुझे उम्मीद है, क्योंकि यह ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां बहुत ज्यादा डोज तैयार की जा सकती है। बहुत कुछ एडजुवेंट (सहायक) पर निर्भर है, लेकिन हमें फेज 1-2 का परफॉर्मेंस चाहिए।'

    'कोर्बेवैक्स' को लेकर उम्मीद

    'कोर्बेवैक्स' को लेकर उम्मीद

    लेकिन, वैक्सीन उद्योग के दिग्गज और लाइफ सांइस इंडस्ट्री के कंसल्टेंट डॉक्टर केवी बालासुब्रमण्यम का मानना है कि यह बहुत ही अच्छी वैक्सीन साबित होगी और सरकार के लिए सस्ती भी पड़ेगी। वो कहते हैं- 'सबयूनिट प्रोटीन वैक्सीन बहुत ही सुरक्षित और प्रभावी होगी। निम्न और मध्यम आय वर्ग वाले देशों के लिए यह कम कीमत वाली कोविड वैक्सीन गेम चेंजर साबित होगी।' लेकिन, एफिकेसी डेटा नहीं होने के चलते ही इसपर सबसे ज्याद चिंताएं जताई जा रही हैं। ऐसे लोग नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं कि सरकार शायद दबाव में ऐसा कदम उठा रही है। उसे तो ऐसी वैक्सीन पर पैसे लगाने चाहिए जो मंजूर हो चुकी है और बड़े पैमाने पर लगाई जा रही है। वैसे जहां तक बायोलॉजिकल-ई को एडवांस देने की बात है तो भारत में बनी इससे पहले की दोंनों वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सिन के निर्माताओं-क्रमश: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को भी 1,500 करोड़ और 750 करोड़ बतौर एडवांस दी गई थी। बाद में इन दोनों को इमरजेंसी यूज की अनुमति मिल गई।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+