Bihar Politics: क्या नीतीश का 'गेम' अभी बाकी है! चिराग पासवान JDU के साथ कर सकते हैं खेल?

नीतीश कुमार के शपथग्रहण समारोह के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा चिराग पासवान को दिल्ली से पटना तक साथ तो ले गए, लेकिन जेडीयू सुप्रीमो के लिए उनके विचारों में पूरी तरह से बदलाव नहीं आया है।

लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता ने बिहार में एनडीए सरकार बनने का स्वागत तो किया है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों को लेकर वह अपने नजरिए पर अभी भी कायम हैं।

bihar nda chirag

नीतीश की नीतियों को लेकर अभी भी मतभेद- चिराग पासवान
चिराग ने कहा है, 'मैंने पहले भी कहा है कि सीएम नीतीश कुमार के साथ मेरा नीतिगत मतभेद है और उसको लेकर मेरा अभी भी मतभेद है। अगर काम उन्हीं की नीतियों के आधार पर चलता रहता है तो आने वाले समय में संभवत: मतभेद बना ही रहेगा। मेरा सदा से मानना रहा है कि उनकी नीतियों से बिहार में विकास नहीं हुआ है।'

यानी चिराग नीतीश के गठबंधन में आने के बाद बिहार में एनडीए को सभी 40 सीटों पर जीत मिलने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अपनी राजनीति के हिसाब से अलग रास्ता अख्तियार करने की गुंजाइश भी रहने दे रहे हैं।

2019 में जीती सभी 6 सीटों पर दावेदारी जता रहे हैं चिराग
चिराग पासवान की पार्टी बिहार की उन सभी 6 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी जता रही है, जिसपर उनके दिवंगत पिता राम विलास पासवान की एलजेपी 2019 में जीती थी। इनमें हाजीपुर सीट भी शामिल है, जो उनके पिता की परंपरागत सीट रही है।

जबकि, तथ्य यह है कि खुद चिराग को छोड़कर अन्य पांचों सीटें दूसरे गुट राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी के पास है। इसमें हाजीपुर सीट भी शामिल है, जहां से केंद्रीय मंत्री और चिराग के चाचा पशुपति पारस सांसद हैं। राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी की कमान भी इन्हीं के पास है।

चिराग का दावा है कि अपने पिता के उत्तराधिकारी वही हैं, इसलिए 2019 में जीती सभी सीटों पर उनकी दावेदारी बनती है। दूसरी तरफ पारस भी खुद को अपने बड़े भाई के राजनीतिक उत्तराधिकारी होने का दावा करते हैं।

तो जेडीयू के खिलाफ भी उम्मीदवार उतार सकते हैं चिराग
चिराग खेमे के सूत्रों का कहना है कि अगर उनकी पार्टी को उनकी मांगी हुई सीटें चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिलीं तो वह उन सभी 6 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे, जहां 2019 में संयुक्त एलजेपी जीती थी।

लेकिन, नीतीश कुमार के लिए चुनौती ये हो सकती है कि चिराग का खेमा ऐसी परिस्थिति में जेडीयू उम्मीदवारों के खिलाफ भी चुनाव लड़ने का संकेत दे रहा है।

जेडीयू का 2020 वाला हो सकता है हाल
गौरतलब है कि चिराग पासवान की पार्टी ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में यही रणनीति अपनाई थी, जिसका खामियाजा नीतीश कुमार की पार्टी को भुगतना पड़ा था और जेडीयू विधायकों की संख्या घटकर 45 ही रह गई थी।

कहीं न कहीं नीतीश इसी खुन्नस में पिछली बार बीजेपी से पलटी मारकर लालू यादव से गले लग गए थे। क्योंकि, उनकी शिकायत थी कि चिराग पासवान ने भाजपा के इशारे पर ही जदयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारे थे।

अगर पिछले लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों के वोट शेयर देखें तो 2019 में जेडीयू को बिहार में करीब 22% वोट मिले थे। वहीं विधानसभा चुनावों में उसका वोट शेयर 15% था। वहीं एलजेपी ने विधानसभा चुनावों में अधिकतर उम्मीदवार जेडीयू की सीटों पर उतारे थे और उसे करीब 6% वोट हासिल हुए थे।

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