बिहार में Covid-19 से सबसे ज्यादा डॉक्टरों की गई जान, IMA ने दी जानकारी
नई दिल्ली, 20 मई। पूरे देश में कहर बरपा रही कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने बड़ी संख्या में डॉक्टरों को भी अपना शिकार बनाया है। महामारी की दूसरी लहर के दौरान जिन राज्यों में सबसे ज्यादा डॉक्टरों की मौत हुई है उनमें बिहार पहले नंबर पर है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक देश भर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू होने के बाद से 280 डॉक्टर अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें 90 डॉक्टर यानि कि लगभग एक तिहाई अकेले बिहार से हैं।

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कोविड बीमारी से मरने वालों डॉक्टरों की संख्या के मामले में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश का नंबर है। वहीं दिल्ली में भी कोविड ने बड़ी संख्या में डॉक्टरों की जान ली है और यह तीसरे नंबर पर है।
आईएमए के पदाधिकारियों और अन्य डॉक्टरों ने राज्यों में काम कर रहे डॉक्टरों में बीमारी के चलते होने वाली उच्च मृत्यु दर की वजह बताई है उसमें इसके लिए डॉक्टरों की कम संख्या, लगातार ड्यूटी करने के कारण सही तरीके से आराम न मिल पाना, राज्य में सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरे कोविड प्रोटोकॉल के पालन की कमी को जिम्मेदारी बताया गया है।
सभी उम्र के डॉक्टरों की मौत
आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि पूरे बिहार में डॉक्टरों की कोविड-19 से मौत हो रही है। मरने वालों में सभी उम्र वर्ग के शामिल हैं हालांकि इनमें अधिकांश 50 साल से ज्यादा उम्र के हैं।
सिंह ने कहा "डॉक्टर हमेशा कोविड मरीजों के संपर्क में आते रहते हैं इसलिए इंफेक्शन होने पर उनमें वायरल लोड ज्यादा रहता है। जब कुछ सप्ताह पहले कोरोना वायरस की लहर ने बुरी तरह झकझोरा था उस समय पटना में कई डाक्टरों को अपने लिए भी ऑक्सीजन नहीं मिल पाई।"
आईएमए के मुताबिक बिहार में कोरोना वायरस की पहली लहर के दौरान 39 डॉक्टरों की मौत हुई थी वहीं दूसरी लहर में अब तक 90 डॉक्टरों की जान जा चुकी है। इनमें से अधिकांश मौतें 1 मार्च से 19 मई के बीच हुई हैं।
राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी
बिहार में डॉक्टरों की भारी कमी है। देश में जहां 1200 लोगों पर 1.4 डॉक्टर उपलब्ध हैं वहीं बिहार में 2400 लोगों पर एक डॉक्टर है। राज्य की 12.4 करोड़ की आबादी पर करीब 30,000 डॉक्टर हैं। इनमें से 18,000 डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में काम करते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि डॉक्टरों की भारी कमी के चलते राज्य में इन्हें पिछले एक साल से, जब से महामारी पहुंची है, ठीक से आराम नहीं मिला है। इसका असर डॉक्टरों की इम्यूनिटी पर पड़ा है और वे वायरस से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।












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