बिहार में कैबिनेट विस्तार की खबरों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया बड़ा बयान
पटना। बिहार में नीतीश सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चा काफी समय से चल रही है। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि दशहरे के बाद नीतीश सरकार का कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है। इस बात का जिक्र खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी पिछले महीने ही किया था। हालांकि अब नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दशहरे के बाद कैबिनेट विस्तार से मतलब ये नहीं कि इसी साल दशहरे के बाद, अगले साल दशहरे के बाद भी ऐसा हो सकता है।

दशहरे के बाद कैबिनेट विस्तार पर नीतीश कुमार ने कही बड़ी बात
दरअसल नीतीश कुमार ने सितंबर में जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक में कैबिनेट विस्तार पर अपनी बात रखते हुए कहा था कि दशहरे के बाद बिहार सरकार का कैबिनेट विस्तार हो सकता है। हालांकि अब उन्होंने जिस तरह से अपनी बात रखी है इससे कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार में कैबिनेट विस्तार इसी साल हो गया फिर अगले साल इस पर पेंच फंस गया है।

अपनी कही हुई बात को नीतीश कुमार ने यूं संभाला
मंगलवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह के दौरान नीतीश कुमार से जब कैबिनेट विस्तार को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैंने दशहरे के बाद की बात कही थी लेकिन ये नहीं कहा था कि इसी साल दशहरे के बाद ऐसा होगा, ये अगले साल दशहरे के बाद भी हो सकता है। जिस तरह से जेडीयू अध्यक्ष ने अपनी बात को रखा ये वाकई चौंकाने वाला था।

कैबिनेट विस्तार पर सस्पेंस कायम
वैसे भी जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के बारे माना जाता है कि वो अपनी बातों की अपने स्तर से व्याख्या करने और उसका अर्थ निकालने में माहिर हैं। जिस तरह से उन्होंने कैबिनेट विस्तार के मुद्दे पर अपनी कही बात पर टिप्पणी की, इसके बाद ये देखना दिलचस्प होगा कि आखिर बिहार सरकार का कैबिनेट विस्तार कब होगा? उनके इस बयान से प्रदेश में सियासत गरमा गई है, जिन नेताओं को कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनने की उम्मीद रही होगी, उन्हें अभी इसके लिए इंतजार करना होगा, जिसकी वजह से उनकी बेचैनी जरूर बढ़ गई होगी।

2019 को लेकर बिहार में सियासत गरमाई
बिहार में कैबिनेट विस्तार अकेला मामला नहीं है। इससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के घटक दलों के बीच सीटों को लेकर सस्पेंस अभी भी कायम है। बीजेपी और जेडीयू के बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद एलजेपी और आरएलएसपी के खाते में कितनी सीटें जाएंगी इसको लेकर पेंच फंसा हुआ है। फिलहाल इन सभी मामलों को लेकर गुणा-गणित का दौर जारी है।












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