अडानी एंटरप्राइजेज को बड़ी राहत, कोर्ट ने पत्रकारों व कार्यकर्ताओं द्वारा असत्यापित जानकारी फैलाने पर लगाई रोक
Adani Enterprises Big Win:"6 सितंबर 2025 (शनिवार) को दिल्ली की एक अदालत ने अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कुछ पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और विदेशी संगठनों को कंपनी के खिलाफ असत्यापित और मानहानिकारक जानकारी और खबरें प्रकाशित करने, शेयर करने या प्रसारित करने से रोक दिया है।
सिविल जज अनुज कुमार सिंह की अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि अडानी समूह के खिलाफ लगातार प्रकाशित किए जा रहे लेख और सोशल मीडिया पोस्ट, कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और उसके वैश्विक व्यापार में बाधा डालने के उद्देश्य से किए गए थे। अदालत ने इन संस्थाओं और व्यक्तियों को अपनी वेबसाइटों, लेखों और सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी सामग्री तुरंत हटाने का निर्देश दिया।

अदालत के आदेश में परंजय गुहा ठाकुरता, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयस्कांत दास, आयुष जोशी, बॉब ब्राउन फाउंडेशन, ड्रीमस्केप नेटवर्क इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गेटअप लिमिटेड, डोमेन डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (इंस्ट्रा) और अन्य अज्ञात व्यक्तियों (जॉन डो) पर रोक लगाई गई है।
कोर्ट ने क्या दिया तर्क?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रथम दृष्टया वादी (AEL) के पक्ष में मामला बनता है। यदि इस तरह के प्रकाशन और प्रसार पर रोक नहीं लगाई गई, तो कंपनी की छवि को और अधिक नुकसान हो सकता है। इससे 'मीडिया ट्रायल' जैसी स्थिति उत्पन्न होगी, जो कंपनी के लिए हानिकारक है।

क्या है आदेश?
आदेश में आरोपित पक्षों को अपनी लेखों, सोशल मीडिया पोस्ट और ट्वीट्स से मानहानिकारक व असत्यापित सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया है। यदि सामग्री हटाना संभव न हो, तो उसे पाँच दिन के भीतर पूरी तरह डिलीट करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, भविष्य में बिना सत्यापन के किसी भी सामग्री को प्रकाशित या साझा करने पर रोक लगाई गई है।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि कंपनी चाहे तो अतिरिक्त लिंक्स उपलब्ध करा सकती है, जिन्हें हटाने का आदेश जारी किया जाएगा। गूगल, यूट्यूब और एक्स जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी सामग्री को 36 घंटे के भीतर सार्वजनिक पहुंच से हटा दें। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, तब तक यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।












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