प्रत्यर्पण मामले में विजय माल्या के खिलाफ अहम फैसला आज
नई दिल्ली। देश के बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाकर फरार बिजनेसमैन विजय माल्या के खिलाफ आज अहम फैसला आ सकता है। चीफ मजिस्ट्रेट एमा ऑर्बूटनॉट आज माल्या के मामले में अपना फैसला सुना सकते हैं। माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर भारत की कोशिशों के बीच आज अहम फैसला आ सकता है। पिछले नौ महीने तक चली सुनवाई सितंबर माह में खत्म हो गई थी, ऐसे में आज माल्या के खिलाफ फैसला आ सकता है। आपको बता दें कि भारत लंबे समय से देश के बैंकों का 9000 करोड़ रुपए लेकर फरार माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिशें कर रहा है। विजय माल्या पिछले काफी समय से यूके में रह रहे हैं।वहीं जब माल्या से पूछा गया कि भारत लौटने पर उनसे किस बात का डर है तो उसने कहा कि उसके मामले की सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी, यह राजनीति से प्रेरित होगी। नेता मुझे कई अपराध का दोषी बना देंगे।

क्या हैं विकल्प
माल्या के खिलाफ मुख्य रूप से जो मामला चल रहा है वह आईडीबीआई बैंक का, जहां से उन्होंने काफी बड़ा लोन लिया था और उस लोन की राशि को उन्होंने ऐसे काम में लगाया था जिसके लिए उन्होंने इसे नहीं लिया था। आज होने वाली अहम सुनवाई में प्रवर्तन निदेशालय के दो अधिकारी और सीबीआई की ओर से मनोहर विशेष शामिल होने वाले हैं। ऐसे में आज अगर माल्या के खिलाफ अगर फैसला आता है तो माल्या उच्च अदालत में अपील कर सकते हैं और इसकी उन्हें अनुमति मिल सकती है। लेकिन अगर फैसला भारत सरकार के खिलाफ आता है तो ईडी और सीबीआई 14 दिनों के भीतर उच्च अदालत में अपील कर सकती है।

पैसा लौटाने का दिया प्रस्ताव
गौर करने वाली बात है कि विजय माल्या ने ट्वीट करके कहा था कि मैं एक रुपए का भी कर्जदार नहीं है, किंगफिशर एयरलाइंस है और बिजनेस में असफलता के कारण पैसा बकाया है। यही नहीं माल्या ने खुद को चोर कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि मैं बैंकों का सौ फीसदी पैसा लौटाने के लिए तैयार हूं, हालांकि माल्या बैंकों का मूलधन लौटाने के लिए तैयार हैं और वह ब्याज की राशि में छूट चाहते हैं। इससे पहले 2016 में माल्या की ने कहा था कि वह 80 फीसदी भुगतान करने के लिए तैयार हैं।

भारतीय जेल पर उठाया था सवाल
आपको बता दें कि विजय माल्या की ओर से 2016 में पीएम मोदी को एक पत्र लिखा गया था, जिसमे कहा गया था कि कमेटी का गठन करके इस मामले की जांच करने की मांग की गई थी। माल्या ने प्रत्यर्पण पर कहा था कि भारतीय जेलों की स्थिति ठीक नहीं है, यहां हवा और प्रकाश की सुविधान नहीं है, जिसके बाद भारतीय अधिकारियों ने आर्थक जेल का वीडियो कोर्ट को उपलब्ध कराया था।
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