आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व अधिकारी का बड़ा दावा, कहा-'पूर्व प्रिंसिपल लावारिस शवों को बेचता था'
आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट अख्तर अली ने डॉ. संदीप घोष पर कई अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। इंडिया टुडे टीवी को दिए गए इंटरव्यू में अली ने आरोप लगाया कि घोष लावारिस शवों को बेचने और बायोमेडिकल कचरे की बांग्लादेश में तस्करी करने में शामिल था। अली ने कहा कि संदीप घोष लावारिस शवों का कारोबार करता था। उसके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। वह बायोमेडिकल कचरे की तस्करी में भी शामिल था। वह इसे अपने अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को बेचता था। फिर इसे बांग्लादेश भेजा जाता था।
अली ने आगे दावा किया कि घोष ने अस्पताल द्वारा जारी किए गए हर टेंडर पर 20% कमीशन लिया। उनके अनुसार टेंडर विशेष रूप से घोष के दो करीबी सहयोगियों सुमन हाजरा और बिप्लब सिंह को दिए गए थे। जिनके पास कुल 12 कंपनियाँ थी। अली ने बताया कि संदीप घोष पहले पैसे लेता था और फिर काम का ऑर्डर देता था। सुमन हाजरा और बिप्लब सिंह की 12 कंपनियाँ थी। हर काम के लिए सिर्फ़ उन्हें ही टेंडर दिए जाते थे।

पूर्व उपाधीक्षक ने यह भी बताया कि उन्होंने इन अवैध गतिविधियों के बारे में राज्य सतर्कता आयोग को सूचित किया था। लेकिन जांच में दोषी साबित होने के बावजूद घोष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अली ने कहा कि उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग को एक जांच रिपोर्ट सौंपी। लेकिन उसी दिन आरजी कर अस्पताल से उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस दिन मैंने जांच रिपोर्ट सौंपी। उसी दिन मेरा तबादला कर दिया गया। इस समिति के अन्य दो सदस्यों का भी तबादला कर दिया गया। मैंने छात्रों को इस आदमी से बचाने के लिए जो कुछ भी कर सकता था किया। लेकिन मैं असफल रहा।
अली ने कहा कि घोष को कई शक्तिशाली व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त था। जिसके कारण उन्हें दो बार तबादला होने के बाद भी अस्पताल के प्रमुख के रूप में वापस आने का मौका मिला। अली ने जोर देकर कहा कि ऐसे व्यक्ति को तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए। वह समाज के लिए हानिकारक है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध के बाद डॉ. संदीप घोष ने प्रिंसिपल पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे के बावजूद उन्हें कुछ ही घंटों में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में नई नियुक्ति मिल गई। हालांकि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अनिश्चितकालीन अवकाश पर भेज दिया।
अली ने घोष पर छात्रों से पासिंग ग्रेड के बदले रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों को जानबूझकर फेल किया गया। ताकि वे बाद में पैसे चुका सकें। अली ने कहा कि कुछ छात्रों को जानबूझकर फेल किया गया। ताकि वह पैसे वसूल सकें।
डॉ. संदीप घोष के खिलाफ इन आरोपों के कारण ममता बनर्जी सरकार ने जनवरी 2021 से आरजी कर मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू की है।












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