महबूबा की अगुवाई में भाजपा की राह कठिन है जम्मू-कश्मीर में
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का आज दिल्ली के एम्स में निधन हो गया है। मुफ्ती के निधन के बाद जम्मू-कश्मीर में सियासी संकट एक बार फिर खड़ा हो गया है। मुफ्ती मोहम्मद के निधन के बाद कयास लगाये जा रहे हैं कि उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती प्रदेश की कमान संभाल सकती हैं। लेकिन महबूबा के मुख्यमंत्री बनाये जाने पर सरकार में सहयोगी पार्टी भाजपा के लिए काफी मुश्किल हो सकती है।
कश्मीर की सियासत में बड़ा नाम थे मुफ्ती मोहम्मद सईद

महबूबा मुफ्ती अपने अलगाववादी बयानों के चलते हमेशा से विवादों में रही हैं। वर्ष 2013 में मुफ्ती ने कश्मीर को भारत का उपनिवेश तक करार दे दिया था। यही नहीं महबूबा ने कश्मीर में धारा 370 के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ का सख्त विरोध किया है। उन्होंने अपने बयानों में कहा था कि धारा 370 को किसी भी सूरत में छुआ नहीं जा सकता है।
ऐसे में एक तरफ जहां केंद्र में सरकार आने के बाद भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 पर विचार करने की बात कही थी साथ ही प्रदेश के लोगों से इस बाबत राय लेने की वकालत की थी। लेकिन महबूबा मुफ्ती के धारा 370 पर विचारधारा दोनों पार्टी के लिए अहम चुनौती होगी। वहीं अगर जम्मू के भाजपा विधायकों का रुख भी महबूबा मुफ्ती के लिए विरोधीभरा रहा है। यही वजह थी कि प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनाने के लिए महबूबा मुफ्ती के बतौर मुख्यमंत्री पद का विरोध हुआ था जिसके बाद उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद को सूबे की कमान सौंपी गयी थी।












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