मानवाधिकार का घोर उल्लंघन: 2014 से 1611 भारतीय प्रवासी कामगारों की मौत, BMS ने दी कतर सरकार को चेतावनी

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कतर में प्रवासी कामगारों के मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई है।

नई दिल्ली, 14 जून : भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कतर में प्रवासी कामगारों के मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई है। भारत में सबसे बड़े केंद्रीय ट्रेड यूनियन बीएमएस ने कहा कि 2014 से कतर में 1611 भारतीय प्रवासी कामगारों की मौत हुई है। जो बेहद ही गंभीर चिंता का विषय है। बीएमएस ने कहा कि मृत परिवारों को अपने प्रियजनों के शव लेने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है।

कतर में काम करते भारतीय प्रवासी मजदूर।

बीएमएस महासचिव बिनॉय कुमार सिन्हा ने कहा कि कतर में काफिला प्रणाली ने भारत के साथ-साथ अन्य दक्षिण एशियाई देशों के श्रमिकों के लिए गंभीर आघात का कारण बना है। पासपोर्ट की जब्ती, ओवरटाइम काम, कुछ समय के लिए रहने की जगह को छोड़ने की अनुमति से इनकार, तंग आवास, यौन शोषण, विशेषज्ञता के क्षेत्र से बाहर जबरन काम करना श्रमिकों के लिए बड़ी मानसिक पीड़ा का कारण है।

तीन मांगों को पूरी करने के लिए कहा

बीएमएस ने कतर की सरकार और ट्रेड यूनियन के सामने इस मुद्दे को उठाया है। इसके अलावा भारत में कतर के राजदूत के सामने भी विरोध प्रदर्शन किया है। इस मुद्दे को श्रम और विदेश मंत्रालय के समक्ष भी उठाया गया था।बीएमएस ने मांग की कि कतर में सभी भारतीय कामगारों को अच्छी और स्वस्थ रहने की स्थिति दी जाए और उनके मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।

मुआवजा देने की मांग

इसके अलावा मौत होने पर शव को तुरंत भारत भेज दिया जाना चाहिए। बीएमएस ने कहा कि मृत के परिवार को भी मुआवजा दिया जाएगा। यदि कतर सरकार इन मोर्चों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो बीएमएस इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मंचों पर जल्द से जल्द उठाने के लिए मजबूर होगी।

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