भारत जोड़ो यात्रा: राजस्थान में 3 दिसंबर को प्रवेश करेगी यात्रा, गुर्जर बाहुल्य इलाके से होकर गुजरेगी

पार्टी को मजबूती देने के लिए इस वक्त कांग्रेस की तरफ से भारत जोड़ो यात्रा की जा रही है। इस वक्त यात्रा महाराष्ट्र में है। वहीं, इसके बाद यात्रा मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगी। 3 दिसंबर को यात्रा मध्य प्रदेश के रास्ते राजस्थान में झालावाड़ के रास्ते प्रवेश करेगी। इसके बाद यात्रा कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर और दौसा जिले से होते हुए अलवर के रास्ते हरियाणा जाएगी। ये सभी इलाके गुर्जर बाहुल्य इलाके हैं। अधिकतर विधानसभा सीटों पर गुर्जर वोटों का दबदबा है। इन सीटों पर सचित पायलट का प्रभाव अधिक है।

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कहा जा रहा है कि इस दौरान सचिन पायलट को अपनी ताकत दिखाने का मौका मिलेगा और डैमेज कंट्रोल में मदद मिलेगी। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि सचिन पायलट विरोधी भी इसे सियासी रूप देने में डटे हुए हैं। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से गुर्जर नेताओं की तरफ से भारत जोड़ो यात्रा का भी विरोध किया जा रहा है। एक गुर्जर नेता ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को राजस्थान में नहीं घुसने देने की धमकी दी थी।

दावा यह भी किया जा रहा है कि जिन गुर्जर नेताओं की तरफ से राहुल गांधी की यात्रा का विरोध किया जा रहा है, वे मुख्यमंत्री अशोक गलतो गुट के हैं। क्योंकि पिछले दिनों कथित तौर पर पायलट गुट के महेश शर्मा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे से इसकी शिकायत की थी। वहीं, गहलोत गुट के धर्मेंद्र राठौड़ के गुर्जरों के साथ मिले होने का आरोप लगाया था। इसके अलावा यह भी दावा किया गया था कि पायलट को बदनाम करने के लिए यह सब किया जा रहा है।

वहीं सचिन पायलट ने भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कहा था कि किसी के विरोध की वजह से कुछ नहीं होता है। क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा को पूरे भारत में सपोर्ट मिल रहा है। इतने बड़े स्तर पर समर्थन मिलने की वजह से भाजपा सहित अन्य पार्टियां इससे डरी हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सचिन पायलट और गहलोत गुट के बीच तकरार और बढ़ सकती है। हालांकि भारत जोड़ो यात्रा के मार्ग के निर्धारण को लेकर दोनों नेताओं का कोई हाथ नहीं है। फिर भी दोनों नेताओं की तरफ से शक्ति प्रदर्शन दिखाने की कोशिश की जा रही है।

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    कांग्रेसी नेताओं की मानें तो अलवर, डूंग, सवाई माधोपुर सहित 5 जिलों में सचिन पायलट का दबदबा है। यही वजह थी कि गहलोत गुट के नेता नहीं चाहते थे कि राहुल गांधी की यात्रा इन रूटों से होकर गुजरे। यही वजह थी कि इन रूटों में बदलाव कराने की कोशिश भी की जा रही थी। लेकन ऐसा नहीं हो सका। आपको बता दें कि गहलोत और पायलट की अदावत बहुत पुरानी है।

    राजस्थान विधानसभा चुनाव 2016 के बाद से ही दोनों गुटों में है तकरार
    सचिन पायलट और अशोक गहलोत गुट के नेताओं के बीच तकरार 2016 विधानसभा चुनाव के बाद से ही चल रही है। समय के साथ यह तकरार कम होने के बजाय बढ़ती चलती गई। 2016 विधानसभा चुनाव में पायलट की नाराजगी के बाद कांग्रेस दो भागों में बंट गई। इधर 25 सितंबर को सचिन पायलट के सीएम बनने के बीच गहलोत गुट के लोगों ने पर्यवेक्षकों के सामने बगावत कर दी। इसके बाद से ही दोनों नेताओं को बीच तनातनी बढ़ती गई है। इसका असर भारत जोड़ों के दौरान भी देखने को मिल रहा है।

    हालांकि, राजस्थान में इसका असर अभी और कितना देखने को मिलेगा यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। दावा कि जा रहा है कि 25 सितंबर की घटना के बाद गहलोत गुट के नेताओं पर कार्रवाई नहीं होने की वजह से सचिन पायलट गुट नाराज है। इस नाराजगी की वजह से आजय माकन इस्तीफा भी दे चुके हैं। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि दोनों गुटों के टकराव की वजह से राहुल गांधी को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से यह भी दावा किया जाता रहता है कि दोनों के नेताओं के बीच कोई टकराव नहीं है। लेकिन जिस तरह के बयान दोनों नेता समय-समय पर देते रहते हैं, उससे बात बाहर आ जाती है। पायलट को सीएम बनाने की बात नहीं मानने पर राकेश मीणा ने उपाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है।

    वहीं, माकन भी इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। हालांकि, खड़गे की तरफ से इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया है। लेकिन माकन मानने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा दिसंबर के पहले सप्ताह यानि कि 3 दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करने वाली है। इस दौरान यात्रा 7 जिलों की 18 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। यात्रा केशोरायपाटन, पीपल्दा, हिंडोली, खानपुर, मनोहरथाना, बांदीकुई, महवा, सिकराय, दौसा, लालसोट और अलवर सहित अन्य विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी।

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