दस ट्रेड यूनियन ने 8 जनवरी को बुलाया 'भारत बंद', जानिए हड़ताल से जुड़ी हर बात
नई दिल्ली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में 8 जनवरी को 'भारत बंद' का ऐलान किया है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने साझा बयान में दावा किया है कि इस हड़ताल में 25 करोड़ लोग शामिल होंगे। बयान में कहा गया है, 'श्रम मंत्रालय अब तक श्रमिकों की किसी भी मांग को लेकर उन्हें आश्वासन देने में विफल रहा है। श्रम मंत्रालय ने दो जनवरी, 2020 को बैठक बुलाई थी। सरकार का रवैया श्रमिकों के प्रति अवमानना का है।'
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इसी बात को लेकर यूनियनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। 2015 के बाद से कोई भी भारतीय श्रमिक सम्मेलन नहीं होने पर यूनियनों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इनका कहना है कि बंद बुलाने के पीछे और भी बहुत से कारण हैं, जैसे रेलवे और हवाईअड्डों का निजीकरण, एयर इंडिया को 100 फीसदी बेचना, बीपीसीएल की बिक्री, बीएसएनएल-एमटीएनएल विलय। इसके साथ ही बेसिक न्यूनतम वेतन को 21,000 रुपये से बढ़ाकर 24,000 रुपये करने की भी मांग है।
इस बंद में शिक्षक और छात्र भी विश्वविद्यालयों की फीस बढ़ोतरी को लेकर हिस्सा लेंगे। हड़ताल का आह्वान 10 ट्रेड यूनियनों- इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एसईडब्ल्यूए, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी, यूटीयूसी और एलपीएफ ने किया है। इस हड़ताल में देशभर के बैंक कर्मचारी शामिल होंगे। जिसके चलते बैंक सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि एटीएम खुले रहेंगे।
कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा लोग भारत बंद में हिस्सा लें। सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा है कि ये बंद लोगों और सरकार का ध्यान अर्थव्यवस्था की खराब हालत और देश के कृषि संकट की ओर आकर्षित करने के लिए बुलाया गया है। बंद के कारण प्रवेश परीक्षा सहित शैक्षणिक संस्थानों की परीक्षाएं प्रभावित होने की संभावना है।












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