Bharat Bandh 2024: भारत बंद के लिए भाजपा ने विपक्ष को घेरा

Bharat Bandh 2024: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के जाने-माने आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते ने अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजनीतिकरण करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इस मामले पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अगस्त को फैसला सुनाया कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण बनाने का संवैधानिक अधिकार है।

Bharat Bandh 2024

इस फैसले का उद्देश्य उन जातियों को आरक्षण देना है जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी हैं। हालांकि, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के उप-वर्गीकरण पिछड़ेपन और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के "मात्रात्मक और प्रदर्शन योग्य डेटा" पर आधारित होने चाहिए, न कि राजनीतिक सनक पर।

उप-वर्गीकरण पर सरकार का रुख

कुलस्ते ने बताया कि उन्होंने 60-70 सांसदों के साथ इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने हमें बताया कि एससी और एसटी के बीच क्रीमी लेयर प्रावधान (उप-वर्गीकरण) लागू नहीं किया जाएगा।" उन्होंने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने "शीर्ष अदालत की राय" को लागू न करने का भी फैसला किया है।

सरकार की ओर से इस स्पष्टता के बावजूद, कुलस्ते ने कहा कि विभिन्न समूहों ने भारत बंद का आह्वान किया है। उन्होंने कांग्रेस और बीएसपी प्रमुख मायावती जैसे राजनीतिक दलों पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने एससी और एसटी के नाम पर राजनीति की और मायावती भी वही कर रही हैं।"

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद

भारत भर में 21 संगठनों ने आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त के फैसले के विरोध में भारत बंद का आयोजन किया है। इन समूहों का तर्क है कि यह फैसला आरक्षण के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है।

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