वर्षों इंतजार के बाद बनी थीं मां, एक भूल की वजह से छिना बच्चा, कोर्ट ने पिता को दी नाबालिग की कस्टडी
वर्षों इंतजार के बाद बनी थीं मां, एक भूल की वजह से छिना बच्चा, कोर्ट ने पिता को दी नाबालिग की कस्टडी

मां के लिए बच्चे से बढ़कर कुछ नहीं होता। बच्चे के दूर होते ही मां तड़प उठती है। नाबालिग बच्चे को साथ रखने का अधिकार कानून में मां को ही है लेकिन हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसके बाद एक महिला जो वर्षों बाद मां बनी थी, वो उससे छिन चुका है। कोर्ट ने महिला की एक भूल के कारण उसके नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसके पिता को दे दी है। इस फैसले के बाद बच्चे को उसके पिता के पास उसकी मां से मीलो दूर भेज दिया है।

मां अपनी भूल पर पछता रही है
ये मामला बेंगलुरू का है, बच्ची जिसकी कस्टडी उसके पिता को दी गई वो बच्ची को पाकर जहां बहुत खुश हैं वहीं उसकी कोर्ट के इस फैसले के बाद उसकी मां अपनी भूल पर पछता रही है।

मैट्रिमोनियल साइट पर मिले थे और 2011 में की थी
दरअसल, बच्ची के माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और दोनों तलाकशुदा थे। उनकी पिछली शादियों से कोई संतान नहीं थी। ये दोनों एक मैट्रिमोनियल साइट पर मिले और 2011 में शादी कर ली। 2015 में उनके लिए एक लड़की का जन्म हुआ।

महिला ने बच्चे के साथ 2018 में ससुराल छोड़ दिया और....
शादी के बाद दोनों के बीच नहीं पटी। जिसके बाद दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज किया, महिला ने बच्चे के साथ 2018 में ससुराल छोड़ दिया। पति ने अपनी पत्नी के अवैध संबंधों का पता चलने पर बच्चे की कस्टडी के लिए केस दर्ज करा दिया। जिसके बाद अब उच्च न्यायालय ने पिता के हक में फैसला सुनाया है और बच्चे की कस्टडी पिता को सौंप दी है।

अवैध संबंध के कारण भूल गई मां का फर्ज निभाना
बेंगलुरू हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उसने "अपने अवैध संबंधों को अधिक महत्व दिया है और बच्चे की उपेक्षा की है।" बच्चे के साथ ससुराल छोड़ने के बाद, महिला ने नाबालिग बच्चे को उसके माता-पिता के पास चंडीगढ़ में छोड़ दिया था, जबकि वह अपने नए साथी के साथ बेंगलुरु में रहती थी।

बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखकर सुनाया ये फैसला
कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा "चूंकि बच्चा अपीलकर्ता और उसके प्रेमी के बीच अवैध संबंध के बीच एक अपवित्र माहौल में पल बढ़ रहा था, इसलिए प्रतिवादी ने आशंका जताई कि बच्चे का हित और उसका भविष्य अपीलकर्ता यानी उसकी मां के पास सुरक्षित नहीं था और बच्चे को पालने के लिए पिता को दिया जाए। एक सुरक्षित और स्थिर वातावरण में लाया गया।
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