बेंगलुरु में ED की छापेमारी, Open Society Foundations से जुड़े विदेशी फंडिंग की जांच
Bengaluru: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बेंगलुरु में कई जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा कानून (FEMA) के उल्लंघन के एक मामले से जुड़ी है। ED की इस जांच में Open Society Foundations (OSF) से जुड़े कुछ लाभार्थी और संस्थाएं निशाने पर हैं। OSF एक वैश्विक संस्था है, जिसे अमेरिकी अरबपति George Soros ने स्थापित किया था।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला OSF द्वारा भारत में लाई गई विदेशी निवेश (FDI) राशि और उसके इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन फंड्स का उपयोग FEMA नियमों के तहत सही तरीके से किया गया या नहीं। अभी तक OSF की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

FEMA कानून के तहत छापेमारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED ने इस जांच के तहत उन संस्थाओं को भी टारगेट किया है जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से जुड़ी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच यह समझने के लिए की जा रही है कि क्या OSF के फंड का सही उपयोग हुआ है या इसका दुरुपयोग किया गया है।
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BJP का George Soros पर आरोप
भारतीय जनता पार्टी (BJP) कई बार George Soros पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा चुकी है। खासकर Adani-Hindenburg विवाद पर उनके बयान के बाद, BJP ने उन पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। पार्टी का आरोप है कि Soros की वित्तीय संस्थाएं भारत के आंतरिक मामलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं।
OSF का भारत में काम
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, OSF ने साल 2021 में भारत में 4,06,000 अमेरिकी डॉलर खर्च किए। यह संस्था खुद को दुनिया की सबसे बड़ी मानवाधिकार, न्याय और जवाबदेही से जुड़ी वित्तीय मदद देने वाली संस्थाओं में से एक बताती है।
1999 में भारत में हुई थी शुरुआत
OSF ने भारत में अपनी उपस्थिति 1999 में दर्ज कराई थी। उस समय यह भारतीय संस्थानों में शोध कर रहे छात्रों को स्कॉलरशिप और फेलोशिप देने का काम करती थी।
2014 में भारत में बढ़ाया काम
साल 2014 में OSF ने भारत में अपने कार्यक्रमों का विस्तार किया और अनुदान (ग्रांट) देने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान संस्था ने तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम किया:
- दवाओं तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास
- न्याय प्रणाली में सुधार
- मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए लोगों के अधिकार और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करना
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