Ayodhya Verdict के आने से पहले जानिए कहां हैं 'रामायण' के प्रभु श्री राम अरुण गोविल?

नई दिल्ली। अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में ऐतिहासिक फैसले की घड़ी नजदीक है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया है, धर्मनगरी अयोध्या में चप्पे-चप्पे पर पैरामिलिट्री फोर्स मुस्तैद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश स्तर पर एक कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने की बात कही है। ये कंट्रोम रूम 24 घंटे काम करेंगे, अयोध्या, वाराणसी, कानपुर, अलीगढ़, लखनऊ, आजमगढ़ जैसे 12 जिलों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है।

'रामायण' से रचा इतिहास

'रामायण' से रचा इतिहास

अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या होगा ये तो जल्द ही पता चल जाएगा लेकिन इस फैसले के पहले देश के बहुचर्चित और ऐतिहासिक धारावाहिक 'रामायण' के राम यानी एक्टर अरुण गोविल की बात करते हैं और जानते हैं कि वो आज कहां हैं?

अरुण गोविल ने 'रामायण' के जरिए सफलता का नया इतिहास लिखा था

रामानंद सागर के शो 'रामायण' के जरिए सफलता का नया इतिहास लिखने वाले अरुण गोविल मूल रूप से यूपी के ही रहने वाले हैं, जी हां, इनका जन्म मेरठ, उत्तरप्रदेश में हुआ था और इनकी प्रारंभिक शिक्षा यूपी में हुई थी लेकिन नॉन फिल्मी बैकग्राउंड होने की वजह से अरूण का भी एक्टिंग करियर काफी संघर्षों से गुजरा है।

फिल्म 'सावन को आने दो' से बने रातों-रात स्टार

फिल्म 'सावन को आने दो' से बने रातों-रात स्टार

एक्टिंग का शौक अरुण गोविल को मात्र 17 वर्ष की उम्र में मुंबई ले आया, जहां उन्होंने जीविका के लिए अपना एक व्यवसाय शुरू किया था, फिल्मों में काम पाने की ललक में इन्होंने प्रोड्यूसर और डायरेक्टरों के घर के चक्कर काटे और एक दिन भगवान ने इनकी सुन ली और इन्हें प्रशांत नंद ने अपनी फिल्म 'पहेली' ( 1977) के लिए साइन किया, फिल्म तो चली लेकिन अरुण गोविल को पहचान नहीं मिली, इनका संघर्ष जारी रहा और फिर वो दिन आया जिसका इंतजार ये लंबे वक्त से कर रहे थे, इनकी फिल्म 'सावन को आने दो' ( 1979) में सुपर हिट हुई और अरुण रातों रात स्टार बन गए, ये फिल्म राजश्री प्रोडक्शन की थी, जो कि साफ-सुथरी और नैतिक मूल्यों की फिल्म बनाने के लिए जाना जाता है।

राम के किरदार के लिए अरुण को छोड़नी पड़ी सिगरेट

राम के किरदार के लिए अरुण को छोड़नी पड़ी सिगरेट

अरुण गोविल की छवि एक आइडियल हीरो की बन गई, जिसका फायदा उन्हें रामायण सीरियल में राम के किरदार पाने में मिला, वैसे इसके बारे में कुछ वक्त पहले ही अरुण गोविल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि रामानंद सागर जब अपने महात्वाकांक्षी धारावाहिक 'रामायण' के लिए राम की खोज कर रहे थे तो मैं, जब ऑडिशन के लिए गया तो उन्होंने मुझे रिजेक्ट कर दिया क्योंकि उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरषोत्तम राम का किरदार निभाने वाले के अंदर कोई बुरी लत नहीं होनी चाहिए, क्योंकि मैं उस वक्त स्मोकिंग करता था इसलिए मुझे उन्होंने रिजेक्ट कर दिया था, इसके बाद मैंने सिगरेट पीना छोड़ दिया और उसके बाद मेरा सेलेक्शन हुआ था।

 एक्टिंग और लाइमलाट से दूर हैं अरुण गोविल

एक्टिंग और लाइमलाट से दूर हैं अरुण गोविल

राम का किरदार अरुण गोविल ने इतनी कुशलता से निभाया कि आज भी जब भी कोई राम की बात करता है तो अरुण गोविल का ही चेहरा सबके सामने आता है, उनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि लोग भगवान राम की जगह उनकी फोटो घरों के दीवारों पर लगाते थे और उनकी पूजा करते थे, किसी इवेंट या कार्यक्रम में अरुण गोविल जाते थे तो लोगों उनके पैर छूकर सच का भगवान मानने लगते थे, फिलहाल राम का किरदार कर दर्शकों के दिल में राम बनकर इतिहास बनाने वाले अरुण गोविल फिलहाल एक्टिंग और लाइमलाट से दूर हैं।

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