Beating Retreat Ceremony 12 दिनों बाद फिर से होगी शुरू, लेकिन न गेट खुलेंगे और न हाथ मिलाएंगे
Beating Retreat Ceremony: सुरक्षा कारणों की वजह से बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी 8 मई को बंद कर दी गई थी। 12 दिनों बाद अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) ने इसे फिर से शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, सेरेमनी में पाकिस्तान के साथ तनाव की वजह से कई बदलाव भी किए गए हैं। सेरेमनी के बाद औपचारिक तौर पर बॉर्डर पर लगे गेट खोलने और दोनों देशों के सैन्य जवान आपस में हाथ मिलाते थे। बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच हाथ मिलाने और बॉर्डर का गेट खोलने जैसी एक्टिविटी अभी बंद ही रहेगी।बीएसएफ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अटारी (अमृतसर), हुसैनीवाला (फिरोज़पुर) और सदकी (फाजिल्का) बॉर्डर पोस्ट्स पर पहले की तरह सेरेमनी आम लोगों के लिए शुरू की जा रही है।
Beating Retreat Ceremony क्या होती है?
अटारी - वाघा सीमा पर यह बीटिंग रिट्रीट समारोह एक दैनिक समारोह है। इसे भारत (सीमा सुरक्षा बल) और पाकिस्तान (पाकिस्तान रेंजर्स) के सुरक्षा बल संयुक्त रूप से 1959 से मनाते आ रहे हैं। इस समारोह के अंत में औपचारिक तौर पर बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के सैन्यकर्मी हाथ मिलाते हैं और कुछ पलों के लिए गेट खोला जाता है। पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा कारणों की वजह से सेरेमनी रद्द कर दी गई थी, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया जा रहा है।

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किसानों के लिए कंटीले तार वाले गेट भी खोले जाएंगे
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी शुरू होने के साथ ही इस इलाके के किसानों के लिए भी बड़ी राहत की खबर आई है। कंटीले तार वाले गेट भी मंगलवार को खुल जाएंगे। पंजाब सरकार के मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने सोमवार को अजनाला के पास शाहपुर बॉर्डर पर बीएसएफ अधिकारियों से मुलाकात की थी। किसानों की जमीन कंटीले तारों के उस पार थी। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने की वजह से गेट बंद कर दिया गया था। अब गेट खुलने के बाद किसान आसानी से उस तरफ जा सकेंगे।
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