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बसवराजू की मौत के बाद बैकफुट पर माओवादी संगठन! छत्तीसगढ़ सरकार से शांति वार्ता का रखा प्रस्ताव

Chhattisgarh Naxals News: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सुरक्षा बलों के अभियान के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। माओवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) ने शांति वार्ता की इच्छा जताते हुए हथियार छोड़ने की पेशकश की है।

संगठन की ओर से जारी एक प्रेस नोट में प्रवक्ता अभय ने सरकार से एक महीने के लिए सीजफायर की मांग की है और बातचीत के लिए वीडियो कॉल का प्रस्ताव रखा है।

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Naxal Peace Proposal: नक्सलियों की मांग: सीजफायर और बातचीत

सोशल मीडिया पर लिखे गए एक लेटर के मुताबिक, नक्सलियों ने साफ किया है कि वे विकास और शांति चाहते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई फिलहाल रोक दी जाए और इसकी घोषणा रेडियो व टीवी के जरिए की जाए। इसके अलावा, नक्सलियों ने एक ईमेल आईडी भी सार्वजनिक की है ताकि संवाद की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

संगठन ने कहा कि उन्हें तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का समय दिया जाए। इस दौरान किसी भी तरह की सैन्य या पुलिस कार्रवाई न हो, ताकि वार्ता की दिशा में सकारात्मक माहौल बन सके। गृह मंत्री शाह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

जनवरी 2024 से सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार तेज़ हुई है। इसी का असर है कि नक्सली संगठन कई इलाकों में कमजोर पड़ गए हैं। बड़ी संख्या में नक्सली या तो मारे गए हैं या फिर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यही वजह है कि अब माओवादी संगठन हथियार डालकर वार्ता की बात करने पर मजबूर हो रहे हैं।

Chhattisgarh government Naxal talks: सरकार की प्रतिक्रिया: जांच होगी लेटर की सत्यता

इस कथित पत्र पर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि सरकार हमेशा शांति चाहती है, हिंसा नहीं। लेकिन वायरल चिट्ठी की सत्यता की जांच बेहद ज़रूरी है। सरकार फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है और आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार कर रही है।

  • माओवादी नेतृत्व पर बड़ा असर
  • विश्लेषकों का मानना है कि नक्सली संगठन इस समय अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।
  • चार महीने पहले संगठन के महासचिव बसवराजू एक मुठभेड़ में मारे गए थे।
  • हाल ही में केंद्रीय समिति सदस्य मोडेम बालकृष्णा एनकाउंटर में ढेर हुआ।
  • वहीं, संगठन की महिला नेता सुजाता ने आत्मसमर्पण कर दिया।
  • इन लगातार झटकों के चलते नक्सलियों की ताकत बुरी तरह प्रभावित हुई है।

सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाइयाँ

  • साल 2025 नक्सलियों के लिए बेहद भारी साबित हुआ।
  • 11 सितंबर 2025 - 1 करोड़ के इनामी बालकृष्ण समेत 10 नक्सली मारे गए।
  • 21 मई 2025 - डेढ़ करोड़ के इनामी बसवराजू समेत 28 नक्सली ढेर।
  • 21 अप्रैल से 11 मई 2025 - कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर 31 नक्सलियों को किया गया ढेर।
  • 9 फरवरी 2025 - इंद्रावती नेशनल पार्क इलाके में 31 नक्सली मारे गए।
  • 20 मार्च 2025 - बीजापुर और कांकेर मुठभेड़ में 30 नक्सलियों का सफाया।
  • इन अभियानों से नक्सलियों का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ है।

'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' में मारे गए टॉप माओवादी कमांडर

मई 2025 में बस्तर में हुई एक मुठभेड़ के दौरान 27 नक्सली मारे गए थे। इनमें संगठन का महासचिव बसवराजू भी शामिल था। अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा था कि नक्सलवाद के खिलाफ तीन दशक की लड़ाई में पहली बार इतने बड़े स्तर के नेता का सफाया हुआ है। इसके बाद 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' के तहत छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 54 नक्सली गिरफ्तार किए गए और 84 ने आत्मसमर्पण किया।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का शांति वार्ता की पेशकश करना एक बड़ी घटना मानी जा रही है। हालांकि सरकार अभी इस पत्र की सत्यता की जांच कर रही है। लेकिन यह साफ है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और माओवादी नेतृत्व को हुए बड़े नुकसान के बाद संगठन अब बचाव की रणनीति अपनाने को मजबूर हो गया है।

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