लिंगायत समुदाय की पहली महिला जगद्गुरु माते महादेवी का निधन
बेंगलुरु। कर्नाटक के बसवा धर्म पीठ के अध्यक्ष और लिंगायत समुदाय की पहली महिला जगद्गुरु माते महादेवी (74) का गुरुवार को बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में शरीर के कई अंगों के विफल होने के कारण निधन हो गया। वह श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित थी और मणिपाल अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से उसका इलाज चल रहा था। उन्हें कई दिनों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ऱखा गया था।

माते महादेवी का अंतिम संस्कार कल दोपहर में किया जाएगा। राजाजीनगर के बसवा मंतप में सार्वजनिक दर्शन के लिए उनका शव रखा गया है। फेफड़ों में संक्रमण होने के बाद माते महादेवी को 8 मार्च को मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह एक साल से किडनी की समस्याओं से जूझ रही थीं। माते महादेवी, लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जे दिलाने के लिए चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थीं।
13 मार्च 1946 को जन्मी महादेवी 12 वीं शताब्दी की कवयित्री, समाज सुधारक अक्का महादेवी से प्रेरित होने के बाद लेखन की ओर आकर्षित हुईं थी। महादेवी ने बीएससी पूरी की और एमए की डिग्री भी हासिल की। महादेवी ने बसवन पर 20 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं।
1966 में स्वामी लिंगानंद द्वारा उन्हें धार्मिक संस्थान में दीक्षित किया गया। महादेवी ने लड़कियों की पढ़ाई के लिए धारवाड़ में जगन्माता अक्का महादेवी आश्रम नाम से एक शैक्षणिक संस्थान भी शुरू किया। जिसका उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षित करना और उन्हें सशक्त बनाना था।












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