Bansuri Swaraj Emotional Post: ‘छह साल हो गए मां…’ सुषमा स्वराज को याद कर बेटी बांसुरी ने किया इमोशनल पोस्ट
Bansuri Swaraj Emotional Post: भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम, जिसने अपने सौम्य व्यक्तित्व, बेबाक आवाज और मजबूत नेतृत्व से सभी का दिल जीता - वह थीं सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj)। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सबसे लोकप्रिय और कद्दावर महिला नेताओं में शुमार सुषमा जी ने अपने राजनीतिक जीवन में हर मोर्चे पर न केवल मजबूती से खड़ी रहीं, बल्कि लाखों लोगों की प्रेरणा भी बनीं।
इसी क्रम में बेटी और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज (Bansuri Swaraj) ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए अपनी मां को याद किया। उन्होंने अपनी मां के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए जो शब्द लिखे, वो किसी को भी भावुक कर सकते हैं।

"6 बरस हो गए मां.." Bansuri Swaraj का पोस्ट
बांसुरी स्वराज ने लिखा -"6 बरस हो गए मां... पर आज भी अनायास ही आंखें आपको ढूंढ लेती हैं - भीड़ में, संसद की तस्वीरों में, हर उस मोड़ पर जहां आप होतीं तो मुझे थाम लेतीं। हर उपलब्धि पर दिल सबसे पहले आपकी आंखें तलाशता है, क्योंकि आपकी नजर से मिली शाबाशी ही मेरी सबसे बड़ी जीत होती थी।"
बांसुरी के इस पोस्ट में वो ममता, विरह और सम्मान झलकता है जो एक बेटी अपनी मां के लिए महसूस करती है, खासतौर पर तब जब मां न केवल व्यक्तिगत बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी एक प्रेरणा रही हो।
राजनीति की एक अनमोल विरासत थीं सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज का जन्म हरियाणा में हुआ था, जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। शुरुआती दौर से ही उनकी तेज़-तर्रार भाषण शैली और मजबूत पकड़ ने उन्हें भाजपा का एक उभरता चेहरा बना दिया। उन्होंने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया और यह साबित किया कि महिला नेतृत्व किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटता।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी सरकार में सुषमा स्वराज को कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने सूचना एवं प्रसारण, स्वास्थ्य, श्रम और संसदीय कार्य जैसे मंत्रालयों का कुशल संचालन किया। उनके कार्यकाल को शालीनता, समझदारी और प्रशासनिक दक्षता के लिए याद किया जाता है।
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद, सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री का दायित्व सौंपा गया। इस भूमिका में उन्होंने अपने काम से एक अलग छाप छोड़ी। खासकर सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने उन्हें आम लोगों के और करीब ला दिया। वे ट्विटर पर सीधे लोगों की समस्याएं सुनतीं और तत्काल समाधान सुनिश्चित करतीं। विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित घर लाना उनकी प्राथमिकता रही। इस कारण से ही उन्हें लोगों ने "जनता की मंत्री" की उपाधि दे दी।
सुषमा स्वराज का कब हुआ निधन?
6 अगस्त 2019 की रात, अचानक दिल का दौरा पड़ने के बाद सुषमा स्वराज को एम्स, दिल्ली में भर्ती कराया गया था। लेकिन इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनकर देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्ष के नेताओं तक, सभी ने सुषमा जी के निधन को राजनीति की अपूरणीय क्षति बताया था।
सुषमा स्वराज जैसी नेता का जाना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक युग का अंत था। आज भी वे लोगों की यादों में जीवित हैं - उनकी भाषा, उनका संवाद, उनकी मुस्कान और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही एक उदाहरण बनी हुई है।












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