Balasore: ट्रैक बहाल, पटरी पर दौड़ी पहली गाड़ी, 15 सेकेंड में हाथ जोड़ते दिखे रेल मंत्री, नेटिजन्स क्या बोले?

बालासोर में रेल मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर रेलवे ट्रैक को बहाल करने का काम टीम के तौर पर किया गया। सबकी जी तोड़ कोशिशों का नतीजा है कि 51 घंटे के अंतर बालासोर के दोनों ट्रैक बहाल हो गए।

Balasore

ओडिशा में तीन ट्रेनों की टक्कर से Balasore रेल हादसा भयावह हो गया। 17 डिब्बे पटरी से उतरे। 270 से अधिक लोगों की मौत हुई। 300 से अधिक अस्पतालों में हैं। हालांकि, इन सबके बीच जीवट का एहसास कराते हुए रेलवे कर्मचारियों और रेस्क्यू वर्कर्स ने पटरी दोबारा बहाल कर दी है।

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    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव हादसे के चंद घंटे बाद बालासोर पहुंचे और 50 घंटों से अधिक समय से ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि 51 घंटे से भी कम समय में ट्रैक रिस्टोर कर लिए गए।

    खास बात ये कि जब पहली गाड़ी उसी ट्रैक पर दौड़ी तो रेल मंत्री लोको पायलट का अभिवादन करने के अलावा शुक्र अदा करने के अंदाज में दोनों हाथ जोड़ते दिखे। वैष्णव व अन्य अधिकारियों के चेहरों पर गंभीरता का भाव आसानी से पढ़ा जा सकता है।

    ट्रैक रिस्टोर होने की खबर आते ही रेलवे फॉलो करने और ट्रेन की जर्नी करने वाले यात्रियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने रेल मंत्री वैष्णव की जमकर सराहना की।

    ग्राउंड जीरो पर लगातार 50 घंटे टिके रहना और रात 11 बजे खुद सीनियर मंत्री का प्रेस को अपडेट करना यूजर्स को काफी अलग लगा। सागर खंडेलवाल नाम के एक यूजर ने कहा कि हादसे की भयावह तस्वीरों को देखकर इतनी जल्दी ट्रैक बहाल होना आसान नहीं था, लेकिन रेल मंत्री की गाइडेंस में ये संभव हुआ।

    संदीप मेहरावल ने वैष्णव को सबसे शानदार मंत्रियों में एक बताते हुए सलाम कहा। एयरफोर्स से रिटायर हुए पीके पिट्रे ने भी वैष्णव की जमकर सराहना की। अविनाश नाम के एक यूजर ने उम्मीद जताई कि काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया गया है, ऐसी आशा है। पूरी उम्मीद है कि रेलवे ट्रैक ट्रेनों का बोझ सहने लायक हों।

    ट्विटर पर यूजर्स के अधिकांश कमेंट्स में देखा जा सकता है कि लोग वैष्णव की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। कई यूजर्स ने कहा कि देश को ऐसे पब्लिक रिप्रजेंटेटिव्स की जरूरत है, जो वक्त आने पर आधी रात में भी हादसे वाली जगहों पर पहुंचे और हालात सामान्य होने तक वहीं टिका रहे।

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