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Bakrid 2025 : 'कानूनी दायरे में करें कुर्बानी, सोशल मीडिया से दूर रहें', मौलाना खालिद रशिद ने जारी की एडवाइजरी

Bakrid 2025: ईद-उल-अजहा के पवित्र अवसर से पहले इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और जाने-माने इस्लामी विद्वान मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सोमवार, 2 जून को Bakrid 2025 के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है।

इसमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया है कि वे केवल उन्हीं जानवरों की कुर्बानी करें जिन पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है, और पूरी प्रक्रिया को कानूनी और सामाजिक मर्यादाओं के भीतर रहते हुए अंजाम दें।

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खुले स्थानों और सार्वजनिक जगहों पर न करें कुर्बानी

मौलाना रशिद ने बताया कि इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अजहा इस वर्ष 7 जून (शनिवार) को मनाई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क़ुर्बानी 7, 8 और 9 जून को दी जा सकती है। उन्होंने सभी से अपील की है कि त्यौहार के दौरान शांति और स्वच्छता बनाए रखें, ताकि समाज में भाईचारे और सौहार्द का वातावरण बना रहे।

एडवाइजरी में मौलाना खालिद रशीद ने विशेष रूप से कहा कि कुर्बानी गलियों, सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि यह धार्मिक कार्य ऐसे स्थानों पर किया जाए जहां स्वच्छता और सामाजिक नियमों का पूरी तरह ध्यान रखा जाए।

स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर ध्यान दें

मौलाना खालिद ने कहा कि कुर्बानी के बाद जानवरों के अवशेष और कचरा सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर न फेंका जाए, बल्कि नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए डस्टबिन का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने यह भी सलाह दी कि क़ुर्बानी का खून नालियों में न बहाया जाए, क्योंकि इससे न केवल दूसरों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, बल्कि यह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी हानिकारक है।

उन्होंने सुझाया कि खून को मिट्टी में दबा दिया जाए, ताकि वह खाद में परिवर्तित होकर पौधों के लिए लाभकारी बन सके। इससे पर्यावरण की रक्षा भी होती है और स्वच्छता भी बनी रहती है। इस्लामी परंपरा के अनुरूप, मौलाना ने अपील की कि कुर्बानी का मांस सही तरीके से पैक किया जाए, और उसमें से एक-तिहाई हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाए। उन्होंने कहा कि यही इस त्योहार की असली भावना, 'बांटने और मदद करने का जज्बा' है।

सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से बचें

मौलाना खालिद रशीद ने लोगों से क़ुर्बानी के समय फोटो खींचने या वीडियो बनाने से परहेज़ करने की भी अपील की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी तस्वीरों और वीडियोज़ को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे अनावश्यक विवाद पैदा हो सकते हैं और भावनाएं आहत हो सकती हैं।

अपने संदेश के अंत में मौलाना ने सभी लोगों से यह अपील भी की कि वे देश में अमन और चैन के लिए दुआ करें। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक जो सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, उनके सुरक्षा और भलाई के लिए भी विशेष दुआ की जानी चाहिए।

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