'सनातन की धज्जियां उड़वा रहें, प्रेमानंद महाराज और रामभद्राचार्य के विवाद में हुई धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री
Premanand Maharaj and Rambhadracharya dispute: उत्तर प्रदेश के संत समाज में इन दिनों भाषाई ज्ञान और भक्ति पद्धति को लेकर एक गहरा विवाद छिड़ गया है।प्रेमानंद महाराज और रामभद्राचार्य के बीच चल रहे विवाद में अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी एंट्री हो चुकी है।
लोगों के नाम की पर्ची निकालकर उनकी समस्या का निवारण करने वाले धीरेंद्र शास्त्री ने दोनों महाराज के बीच चल हरे विवाद पर स्पष्ठ शब्दों में कहा कि लोग संतों को आपस में लड़वाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म को नुकसान हो रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों पर बहस नहीं होनी चाहिए।

बता दें इस मामले की शुरुआत तब हुई जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक पॉडकास्ट में संत प्रेमानंद महाराज को "चमत्कारी" मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को चुनौती दी कि यदि वे वास्तव में चमत्कारी हैं, तो अपने संस्कृत श्लोकों का हिंदी में अर्थ बताकर दिखाएं।
रामभद्राचार्य की इस टिप्पणी ने संत समाज को दो स्पष्ट खेमों में बांट दिया है। एक वर्ग प्रेमानंद महाराज का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग कथावाचन के लिए संस्कृत ज्ञान की अनिवार्यता के रामभद्राचार्य के तर्क का समर्थन कर रहा है।
रामभद्राचार्य का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद प्रेमानंद के समर्थकों ने इसे रामभद्राचार्य का अहंकार बताया। हालांकि, बाद में रामभद्राचार्य ने सफाई देते हुए कहा कि प्रेमानंद उनके पुत्रवत हैं और उनके मन में कोई ईर्ष्या नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री बोले- वे चमत्कार को नहीं मानते
इस पर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि उनके गुरुदेव रामभद्राचार्य का एक संदेश काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि गुरुदेव ने पत्रकार के सवाल पर कहा था कि वे चमत्कार को नहीं मानते। शास्त्री ने इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि वे खुद भी चमत्कारों के बजाय बजरंग बली और राम जी पर भरोसा करते हैं।
संतों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रहे
बागेश्वर बाबा ने यह भी कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर इन दोनों संतों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के विवाद से सनातन धर्म का ही नुकसान होगा। शास्त्री ने उल्लेख किया कि प्रेमानंद महाराज ने गुरुदेव की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कुछ लोग बीच में आकर सनातन धर्म की छवि को खराब कर रहे हैं।
शास्त्री ने दोनों संतों की प्रशंसा की
शास्त्री ने दोनों संतों की प्रशंसा की। उन्होंने प्रेमानंद महाराज की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भजनों के माध्यम से युवाओं को सनातन धर्म से जोड़ा है। वहीं, रामभद्राचार्य ने राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में विजय हासिल की। शास्त्री ने जोर देकर कहा कि दोनों संत अपने-अपने स्थान पर पूजनीय हैं और गुरुजी के मन में कभी किसी के प्रति ईर्ष्या नहीं रही है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेमानंद महाराज की भक्ति पद्धित पर उठाए सवाल
वहीं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी इस विवाद में अपनी राय रखी है। उन्होंने परोक्ष रूप से प्रेमानंद महाराज की भक्ति पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि "शास्त्र और ज्ञान के बिना अध्यात्म अधूरा है।"
शंकराचार्य का यह बयान जगद्गुरु रामभद्राचार्य के विचारों का समर्थन माना जा रहा है, जिससे उनका झुकाव रामभद्राचार्य के पक्ष में स्पष्ट होता है। इस पूरे प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि संत समाज किसी एक मत पर सहमत नहीं है।
एक ओर, कुछ लोग प्रेमानंद महाराज को "कलियुग का दिव्य संत" मानकर उन्हें जनमानस का मार्गदर्शक बताते हैं, वहीं दूसरी ओर, उनके चमत्कारों और आध्यात्मिक ज्ञान पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह विवाद फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है।












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