बाबरी विध्वंस केस में 28 साल बाद आया फैसला, सभी आरोपी बरी
नई दिल्ली। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने से संबंधित केस में आज सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाया। घटना के 28 साल बाद मामले में फैसला आया है। अदालत ने सभी मुल्जिमों को अदालत में रहने को कहा था। इस मामले में भाजपा के सीनियर लीडर लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 49 आरोपी हैं। इनमें से 17 की मौत हो चुकी है। वहीं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, सतीश प्रधान और महंत नृत्य गोपाल दास अस्वस्थ होने के कारण आज कोर्ट नहीं पहुंचे।

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सीबीआई कोर्ट की ओर से बरी किए गए आरोपियों में लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, विनय कटियार, महंत नृत्य गोपाल दास, उमा भारती, महंत धर्मदास, डॉ. रामविलास वेदांती, चंपत राय, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडे, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेशत्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाशपांडे, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आयार्च धर्मेंद्र देव, सीधर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर शामिल हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव आज इस पर फैसला सुनाने वाले हैं, खास बात ये है कि एसके यादव अपने पद पर तयशुदा वक्त से एक साल ज्यादा साल कार्यरत हैं, दरअसल, इस केस के लिए खासतौर पर उनका कार्यकाल बढ़ाया गया है, दूसरी दिलचस्प बात यह भी है कि यह फैसला 30 सितंबर, 2020 को आ रहा है और उन्हें ठीक एक साल बाद इस मामले में फैसला सुनाना है।
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