खड़ाऊँ से स्वामी रामदेव ने बचपन में की थी अपने प्राणों की रक्षा, जानिए उनकी अनसुनी कहानी
नई दिल्ली। योग गुरू स्वामी रामदेव के जीवन पर एक टीवी सीरियल शुरु हो रहा है। शो में बाबा के जीवन की संघर्ष भरी दास्तां बयां की जाएगी। इस दौरान सीरियल की लॉन्चिंग पर बाबा रामदेव ने अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाओं को मीडिया के साथ साझा किया। इस दौरान बाबा ने बताया कि, उन्होंने सात बार मौत को भी करीब से देखा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबा रामदेव ने बताया कि गांव में उनके ही रिश्ते के लोग उनकी मां के साथ क्रूरता करते थे।

मेरी मौत का पूरा इंतजाम था लेकिन मैं बच गया
बाबा ने बताया कि जब वह छोटे थे तो अपने ही खून के रिश्तों ने (चाचा-ताऊ)उनकी मां के साथ बहुत क्रूरता की थी। बाबा बताते हैं कि इस दौरान उन पर खेत जोतते वक्त जानलेवा हमला किया गया था।'हरिद्वार पहुंचने पर मेरा साथ षडयंत्र हुआ कि एक बार 50 से ज्यादा लोगों ने मुझे घेर लिया था। मेरी मौत का पूरा इंतजाम था लेकिन मैं बच गया।' उस वक्त बाबा ने अपने प्राणों की रक्षा अपने ‘पादक त्राण' (पैरों में पहनने वाली चप्पल) से की थी।

7 बार मौत को करीब से देखा
बाबा ने बताया कि, उन्होंने एक बार गलती से ऐल्युमिनियम पात्र में उबला दूध पी लिया था। इस वजह से उनके शरीर में आर्सेनिक का जहर फैल गया। सैकड़ों उल्टियां हुईं। तब अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद भी मैंने उदम्बर गोलर के पत्तों के रस का सेवन किया। 7 बार मौत को करीब से देखने के बाद भगवान के विधान, भगवान की न्याय व्यवस्था और जीवन की नश्वरता का पता चला।'

मेरे हाथों में भाग्यरेखा नहीं
रामदेव ने कहा, 'मैंने हर विरोध और तिरस्कार को अपनी ताकत बनाया। मेरे सफर में मेरे गुरु आचार्य वार्ष्णेय हमेशा साथ रहे।' रामदेव ने कहा कि वह अनपढ़ माता-पिता के बेटे हैं और पैदल चलकर सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते थे। रामदेव बाबा की जिंदगी पर आधारित सीरियल ‘रामदेव: एक संघर्ष' बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन के प्रोडक्शन हाउस के अंतर्गत बन रहा है। 'मेरा हाथ देखकर कहते थे कि मेरे हाथों में भाग्यरेखा नहीं है। मैंने कभी इस बात पर विचार भी नहीं किया। विवेकानंद के आदर्शों पर चलकर मैं आज यहां पहुंचा हूं। भारत देश में जन्म लेना ही मेरे सौभाग्य है।












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