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Ayodhya Verdict: रामलला को मिली विवादित जमीन, जानिए अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें

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    Ayodhya Verdict:अयोध्या में ही बनेगा Ram Mandir और Masjid, देखिए फैसले की बड़ी बातें |वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। देश की सबसे पुराने विवाद अयोध्या जमीन विवाद में आज देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्याय को दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में सुन्नी बोर्ड को अलग से 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया है।

    चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया है। पांच जजों की बेंच ने अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर करेगी। वहीं अयोध्या में ही मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मिलेगी। आइए जानें इस ऐतिहासिक फैसले की 10 बड़ी बातें....

     अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला

    अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद मामले में पैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। कोर्ट ने कहा कि हिन्दुओं की यह आस्था अविवादित है कि भगवान राम का जन्म स्थल ध्वस्त संरचना है। उन्होंने कहा का सीता रसोई राम चबूतरा, भंडार गृह की उपस्थिति के मिले सबूत इस तथ्य का दावा पेश करते हैं।

     केंद्र सरकार बनाएगी ट्रस्ट

    केंद्र सरकार बनाएगी ट्रस्ट


    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलला के जमीन पर केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाकर, योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फैसले आस्था और विश्वास, दावे के आधार पर नहीं दिए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हैं हिंदुओं का विश्वास है कि अयोध्या भगवान राम का जन्मस्थान है।

     मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन

    मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन

    सुप्रीम कोर्ट ने मुस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन आवंजिट कराने का नि र्देश दिया। कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ था।

     निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज

    निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज

    सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में तीसरे पक्ष निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया। निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमने 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन को खारिज करते हैं।

    खाली जमीन पर नहीं बनी बाबरी मस्जिद

    खाली जमीन पर नहीं बनी बाबरी मस्जिद


    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। वह रचना इस्लामिक नहीं थी। वहां जो कलाकृतियां मिली वो भी इस्लामिक नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते।

    सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

    सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। कसौटी का पत्थर, खंभा आदि देखा गया। कोर्ट ने कहा कि ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे बनी संरचना इस्लामिक नहीं थी लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह साबित नहीं किया कि मस्जिद के निर्माण के लिये मंदिर गिराया गया था।

    हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं

    हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं। कोर्ट ने कहा कि मुख्य गुंबद को ही जन्म की सही जगह मानते हैं। अयोध्या में राम का जन्म होने के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते। मुख्य नायायाधीश ने कहा कि 1991 का प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट धर्मस्थानों को बचाने की बात कहता है. एक्ट भारत की धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है।

    ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं

    ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं

    अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मस्ज़िद 1528 की बनी बताई जाती है लेकिन कब बनी इससे फर्क नहीं पड़ता। कोर्ट ने कहा कि ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। 12वीं सदी से 16वीं सदी पर वहां क्या हो रहा था, साबित नहीं हुआ।

     सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में बदला दावा

    सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में बदला दावा


    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में अपने दावे को बदला। उन्होंने पहले कुछ कहा, बाद मे नीचे मिली रचना को ईदगाह कहा। कोर्ट ने कहा कि साफ है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बना था। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। कोर्ट ने कहा कि ASI ने वहां 12वीं सदी की मंदिर बताई। विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। रिपोर्ट में इस संरचना में कसौटी का पत्थर, खंभा आदि की बात कही गई।

    एक मत से आया फैसला

    एक मत से आया फैसला

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक मत से आया। कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले केस नंबर 1501, शिया बनाम सुन्नी वक्फ बोर्ड केस में एक मत से फैसला आया। इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया गया।

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