Vikramaditya Singh: नेतृत्व को चुनौती देने वाले ये कांग्रेसी मंत्री कौन हैं? राम मंदिर कार्यक्रम में हुए शामिल
कांग्रेस नेतृत्व ने अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकरा दिया था। लेकिन, हिमाचल प्रदेश सरकार के एक मंत्री विक्रमादित्य सिंह पार्टी और एक विधायक आला कमान के नजरिए को ठुकराते हुए इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं।
विक्रमादित्य सिंह के साथ हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के एक एमएलए सुधीर शर्मा ने अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

पहले की थी प्राण प्रतिष्ठा में जाने की घोषणा
8 जनवरी को विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि वह अयोध्या जाएंगे, क्योंकि इस तरह के समारोह में शामिल होने का अवसर जीवन में एक ही बार मिलता है।
तब उनका कहना था, 'इस ऐतिहासिक दिन का हिस्सा बनना जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है और 'देव समाज' में आस्था रखने वाले एक हिंदू होने के नाते, यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं इस मौके पर उपस्थित रहूं और भगवान के 'प्राण प्रतिष्ठा' का साक्षी बनूं।'
कांग्रेस की ओर से निमंत्रण ठुकराने पर बदल गए थे सुर
लेकिन, 10 जनवरी को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने यह कहकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था कि यह बीजेपी और आरएसएस का कार्यक्रम है।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता सोनिया गांधी और अधीर रंजन को निमंत्रण दिया गया था। इसपर विक्रमादित्य सिंह के भी सुर बदल गए और कहा कि उन्होंने कभी भी 22 जनवरी को अयोध्या जाने की बात नहीं कही।
उन्होंने कहा था, 'पार्टी हाई कमान ने साफ किया है कि धार्मिक तौर पर और जिसमें कोई राजनीति नहीं है, हर कोई जब भी चाहता है मंदिर जाने के लिए स्वतंत्र है, इसी लिए हम निश्चित ही मंदर जाएंगे। मैं नहीं कहूंगा कि मैं 22 जनवरी को जाऊंगा, लेकिन जब भी मुझे लगेगा मैं जाऊंगा।'
विक्रमादित्य सिंह कौन हैं?
हिमाचल प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और राज्य के 6 बार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के बेटे हैं।
विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के एमएलए हैं और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वे रविवार को ही चंडीगढ़ से लखनऊ पहुंच गए थे।
यूपी सरकार ने राजकीय मेहमान किया घोषित
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने उन्हें राजकीय मेहमान घोषित किया है। 1989 में जन्मे विक्रमादित्य सिंह की मां प्रतिभा सिंह अभी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ-साथ मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी हैं।
2023 के विधानसभा चुनाव के बाद वह मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रही थीं। लेकिन, कांग्रेस नेतृत्व ने सुखविंदर सिंह सुक्खू में भरोसा दिखाया।
विक्रमादित्य पूर्ववर्ती बुशहर रियासत के राजा भी कहलाते हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में एमए किया है। वे 2013 से लेकर 2017 तक हिमाचल प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं। 2023 से पहले वे 2017 में पहला विधानसभा चुनाव जीते थे। (इनपुट-पीटीआई)












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