ऑस्ट्रेलियाई PM ने देखी आत्मनिर्भर भारत की ताकत, INS विक्रांत पर जाने वाले पहले विदेशी प्रधानमंत्री बने
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को आत्मनिर्भर भारत की ताकत देखी। उन्होंने आईएनएस विक्रांत का निरीक्षण किया।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भारत के दौरे पर हैं। इस दौरान गुरुवार को उन्होंने मुंबई के तट पर आत्मनिर्भर भारत की ताकत देखी। उन्होंने नौसेना अधिकारियों के साथ स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निरीक्षण किया। उन्होंने पूरी तरह से भारत में तैयार लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) के बारे में भी जानकारी ली।
भारतीय नौसेना के मुताबिक पीएम एंथनी पहले ऐसे विदेशी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने स्वदेशी युद्धपोत विक्रांत का दौरा किया। उनको नौसेना के जवानों ने गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद उनको भारत में तैयार एलसीए के बारे में बताया गया। वो उसके कॉकपिट में भी बैठे।
वहीं इस दौरे पर पीएम अल्बनीज ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर आईएनएस विक्रांत पर पहुंचा, मैं यहां आकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। ऑस्ट्रेलिया के लिए भारत एक शीर्ष स्तरीय सुरक्षा भागीदार है। हिंद महासागर दोनों देशों की सुरक्षा और समृद्धि का केंद्र है। हमारे दोनों देशों के इतिहास में कभी भी ऐसा कोई बिंदु नहीं आया जहां हमारे पास इतना मजबूत सामरिक संरेखण रहा हो। उन्होंने आगे कहा कि हम दोनों अपने व्यापार और आर्थिक भलाई के लिए इंडो-पैसिफिक में समुद्री लेन तक मुक्त और खुली पहुंच पर निर्भर हैं। हम नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने और इंडो-पैसिफिक को खुला, समावेशी और समृद्ध सुनिश्चित करने के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता साझा करते हैं।

मालाबार में होगा नौसेना का युद्धभ्यास
आपको बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया करीबी रणनीतिक साझेदार हैं। इस साल अगस्त में ऑस्ट्रेलिया भारत, जापान और अमेरिका के साथ मालाबार नौसेना अभ्यास आयोजित करेगा। भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया के तलिस्मान सेबर अभ्यास में भाग लेगा।
पिछले साल सितंबर में हुआ था शामिल
आईएनएस विक्रांत भारत का दूसरा विमानवाहक युद्धपोत है, जिससे पिछले साल सितंबर में कमिशन प्राप्त हुआ था। इस 45,000 टन के युद्धपोत को 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा आईएनएस विक्रांत भारत में बनने वाला सबसे बड़ा युद्धपोत है। इसमें 30 विमान तैनात हो सकते हैं, जिनमें मिग-29K फाइटर जेट, LCA और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इस युद्धपोत पर 1600 से ज्यादा सैनिकों की तैनाती की जाती है।












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