Atul Subhash Case: अतुल सुभाष के भाई ने लगाई न्याय की गुहार, कहा-मर्दों का कहीं उठ ना जाए शादी से भरोसा
बेंगलुरु में मृत पाए गए 34 वर्षीय टेक प्रोफेशनल अतुल सुभाष का परिवार न्याय की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि उनकी पत्नी और उनके रिश्तेदारों ने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया। सुभाष ने रंबल पर 24 पन्नों का नोट और 90 मिनट का वीडियो छोड़ा है, जिसमें उनकी पत्नी, पत्नी के परिवार और उत्तर प्रदेश के एक जज द्वारा वर्षों तक किए गए टार्चर के बारे में बताया गया है।
अतुल की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हर तरह 'जस्टिस फॉर अतुल' की बात चल रही है। सुभाष के भाई विकास ने भ्रष्टाचार से मुक्त निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की मांग की है। उन्होंने न्यायिक प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए तथ्यों पर आधारित निर्णयों के महत्व पर जोर दिया। विकास ने चिंता व्यक्त की कि भ्रष्टाचार वित्तीय शोषण के डर से पुरुषों को शादी करने से रोक सकता है।

भावनात्मक स्तर पर किया गया परेशान
अपने नोट में, अतुल ने अपने चार साल के बेटे के लिए वित्तीय मांग करने और बाल रखरखाव विवादों को लेकर भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उनकी मृत्यु के बाद, अधिकारियों ने उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया, उनके माता-पिता निशा और अनुराग और चाचा सुशील के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।
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अतुल की पत्नी और ससुराल के लोगों पर उत्पीड़न के आरोप
सुभाष के चाचा पवन कुमार और चचेरे भाई बजरंग अग्रवाल ने निकिता के परिवार द्वारा उत्पीड़न के आरोपों को दोहराया। उन्होंने उन पर बच्चे के भरण-पोषण के लिए अत्यधिक मांग करके सुभाष का आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दबावों के कारण वह भावनात्मक रूप से परेशान हुआ और आखिरकार अपनी जिन्दगी खत्म करने का निर्णय लिया।
'पुरुषों का शादी से उठ जाएगा भरोषा'
बेंगलुरु में पीटीआई वीडियो से बात करते हुए, सुभाष के भाई बिकास ने कहा, "मैं चाहता हूं कि मेरे भाई को न्याय मिले। मैं चाहता हूं कि इस देश में एक कानूनी प्रक्रिया हो जिसके माध्यम से पुरुषों को भी न्याय मिल सके। मैं कानूनी कुर्सी पर बैठे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता हूं और भ्रष्टाचार कर रहे हैं क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग न्याय की उम्मीद कैसे करेंगे।"
सिस्टम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि न्याय की उम्मीद तभी की जा सकती है जब यह भ्रष्टाचार मुक्त हो। उन्होंने कहा कि जब हर पक्ष को समान रूप से सुना जाता है और तथ्यों के आधार पर बहस की जाती है। उन्होंने कहा, "...न्याय की उम्मीद तभी की जा सकती है जब निर्णय तथ्यों के आधार पर किए जाएं और अगर ऐसा नहीं होता है, तो लोगों का धीरे-धीरे न्यायिक प्रणाली से विश्वास उठने लगेगा। इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहां लोग शादी करने से डरने लगेंगे। पुरुषों को यह लगने लग सकता है कि अगर उन्होंने शादी कर ली तो वे सिर्फ पैसे निकालने का एटीएम बनकर रह जाएंगे।''
सुभाष का शव सोमवार को मराठाहल्ली पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत आने वाले मंजूनाथ लेआउट इलाके में उनके आवास पर लटका हुआ पाया गया। जिस कमरे में उन्होंने कथित तौर पर अपना जीवन समाप्त कर लिया, उनके कपड़े पर "जस्टिस इज ड्यू" लिखा हुआ था।
जांच के लिए यूपी पहुंची टीम
जांच के सिलसिले में पुलिस की एक टीम उत्तर प्रदेश गई है। उनका लक्ष्य आरोपी परिवार के सदस्यों से गहन पूछताछ करना और सभी आरोपों की जांच करना है। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि सुभाष और निकिता के बीच वैवाहिक कलह ने स्थिति के यहां तक बिगड़ने में अहम भूमिका निभाई। निकिता के चाचा ने अतुल की मौत में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि अदालती कार्यवाही के कारण वे पिछले तीन साल से उनसे संपर्क में नहीं थे। सुशील का मानना है कि अदालत में सच्चाई सामने आएगी और निकिता समय आने पर आरोपों का जवाब देगी।
वैवाहिक कलह का खुलासा
पुलिस ने खुलासा किया कि अतुल सुभाष और निकिता के बीच वैवाहिक कलह स्पष्ट थी। उसने उत्तर प्रदेश में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। सुभाष ने अपनी मौत की सूचना कई लोगों और एक एनजीओ से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुप में डाली थी, जिससे वह जुड़ा हुआ था। सुभाष ने 2019 में निकिता से शादी की, और अगले साल उनके बेटे का जन्म हुआ। बीते तीन साल से बढ़ते विवाद के कारण दोनों अलग रह रहे थे।
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शुरू में, परिवार ने प्रति माह ₹ 40,000 की मांग की, बाद में इसे दोगुना कर दिया, और फिर चाहते थे कि अतुल ₹1 लाख उसे हर महीने दिया करे। कोर्ट के चक्कर और मानसिक दवाब से परेशान होकर अंत में अतुल सुभाष ने मौत को गले लगा लिया। उनके परिवार के साथ-साथ पूरा देश पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया की उम्मीद करते हुए न्याय की मांग कर रहा है।












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