32 साल बाद दोहराया इतिहास, इन वजहों से जीती 'अम्मा'
नयी दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और एआईडीएमके की मुखिया जयललिता ने 32 साल बाद एक बार फिर से इतिहास को दोहराया है। 32 साल बाद तमिलनाडु में पहली बार राज्य की जनता किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता में रहने का मौका दिया है। आपको बता दें कि तमिलनाडु में सिर्फ एमजी रामचंद्रन ही थे जिन्होंने 1977 से 1988 तक लगातार तीन चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई थी। जयललिता की सैलरी 1 रूपया लेकिन कमाई 66 करोड़..बात कुछ हजम नहीं हुई
अब जयललिता अपनी दूसरी पारी शुरू करने जा रही हैं। अम्मा ने शानदार जीत हासिल करते हुए 110 सीटें हासिल की और इस बार फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने को तैयार हो गईं है। ऐसे में ये जानना बेहद जरुरी है कि उनकी जीत के पीछे क्या वजहें रही? जिन कारणों से तमिलनाडु की जनता ने एक बार फिर से जयललिता के हाथों में सत्ता दी है? जयललिता के जीत के पीछे क्या रही मुख्य वजहें

युवा बनें मुख्य वजह
जयललिता की जीत के पीछे सबसे अहम हाथ रहा तमिलनाडु की 60 लाख युवा मतदाताओं का। जिन्होंने पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इन युवा मतदाताओं ने 92 साल के करुणानिधि की बजाय 68 साल की अम्मा पर ज्यादा भरोसा दिखाया।

अम्मा की जीत
जयललिता के लोकलुभावने वादे उनके जीत में सबसे बड़ी वजह रहे। उम्मीद ने अप ने मेनिफेस्टों में लोगों को फ्री बिजली, फ्री मोबाईल फोन आदि देने का विदा किया है।

सस्ते दरों पर मिला सामान
अम्मा के नाम से लोकप्रिय जयललिता ने अपने 5 साल के कार्यकाल में जनता को लुभाने वाले खूब काम किये। उनकी अम्मा कैंटीन ने खूब सूर्खियां बंटोरी। सस्ते दरों पर लोगों को खाना मुहैया कराया गया, जिसे लोगों ने खूब सराहा।

लोगों के बीच लोकप्रिय हैं अम्मा
अपने शासन में जयललिता ने अम्मा नाम से कई ब्रांड शुरु किए। जैसे अम्मा मिनरल वॉटर, अम्मा सब्जी की दुकान, अम्मा फार्मेसी, अम्मा सीमेंट, जहां सस्ती दरों पर लोगों को चीजें मुहैया कराई गई।

छवि में हुआ सुथार
उनकी जीत के पीछे एक बड़ी वजह ये भी रही कि पिछली बार की तरह उनके ऊपर भ्रष्टाचार का कोई बड़ा आरोप नहीं लगा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार के पुराने मामले में बरी कर दिया। जिससे उनकी छवि मतदाताओं की नजर में सुथरी।

अम्मा के आगे सब फेल
अम्मा ब्रांड के सामने मोदी लहर भी फीकी पड़ गई। जयललिता के व्यक्तित्व का ही असर था कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 39 में 37 सीटों पर जीत हासिल की।

करते हैं पूजा
अम्मा के नाम से मशहूर जयललिता को अपनी आलोचना पसंद नहीं आती। वहीं उनके कार्यकर्ता और समर्थक उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं और जयललिता ऐसी श्रद्धा का बुरा नहीं मानतीं।

उम्र का मिला फायदा
इसके अलावा तमिलनाडु में लोगों के सामने जयललिता के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। लोग 92 साल के बीमार करूणानिधि पर भरोसा नहीं कर पाएं।

अम्मा की जीत
डीएमके चीफ करुणानिधि के परिवार में ही फूट है। करूणानिधि के बाद उनकी गद्दी कौन संभालनेगा इसे लेकर संशय हैं। ऐसे में जनता ने डीएमके के बजाए जयललिता का साथ देना बेहतर समझा।

अम्मा की सरकार
करुणानिधि के बेटों पर भ्रष्टाचार के कई मामले है। चेन्नई से लेकर दिल्ली तक में वो भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त है। डीएमके के बेटों का क्राईम ग्राफ काफी खराब है। ऐसे में जयललिता के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा।












Click it and Unblock the Notifications