Gujarat Assembly Election 2017: हार्दिक,अल्पेश और जिग्नेश के बाद भी कांग्रेस के हाथ खाली, गुजरात अब भी मोदी के साथ

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    Gujarat Election 2017 Results: Analysis with Tavleen Singh | Himachal Results | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। एक बार फिर से गांधी और पटेल की धरती गुजरात में कमल खिलता नजर आ रहा है। रूझानों से साफ हो गया है कि गुजरात वासियों के अंदर भले ही बीजेपी के खिलाफ नाराजगी हो कुछ मुद्दों को लेकर लेकिन उन्हें भरोसा अभी भी पीएम मोदी और कमल पर ही है और उन्हें हार्दिक,अल्पेश और जिग्नेश किसी पर भरोसा नहीं हैं, जिनके दम पर राज्य में मरणासन्न पड़ी कांग्रेस सत्ता का ख्वाब देख रही थी, इसमें किसी को शक नहीं कि इस बार के चुनाव में गुजरात में एक अलग ही लहर देखी गई, विकास की बात करते-करते इस बार मोदी का ये राज्य जातियों के भंवर में आकर बस गया लेकिन जीत फिलहाल मोदी के विकास ही दिख रही हैं।

    क्या रहा पूरा घटनाक्रम

    क्या रहा पूरा घटनाक्रम

    राज्य में 9 दिसंबर और 14 दिसबंर को दो चरणों में चुनाव कराए गए थे, जबकि छह सीटों पर दोबारा से चुनाव रविवार यानी 17 दिसंबर को हुए थे। गुजरात विधानसभा की 93 सीटें ऐसी हैं, जो कि जाति और धर्म पर बंटी थी, जिनमें से 33 सीटें ओबीसी और 15 सीटें पाटीदार की थी।

     कांग्रेस खेल खेलना चाहती थी

    कांग्रेस खेल खेलना चाहती थी

    इन्हीं पर कांग्रेस खेल खेलना चाहती थी लेकिन उसके साम-दाम-दंड-भेद सारे मंतर यहां फेल हो गए और जनता ने एक बार फिर से मोदी पर ही विश्वास किया। चुनावी रुझान बता रहे हैं कि पटेल बाहुल्य सीटों पर भाजपा का ही वर्चस्व है जो कि किसी भी सूरत में हार्दिक पटेल के लिए यह अच्छे संकेत नहीं है।

    अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी

    अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी

    हालांकि दो युवा नेता अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी अपनी-अपनी सीटों पर आगे चल रहे हैं। आपको बता दें कि 35 वर्षीय जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ वडगाम में कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।

    पाटीदार समुदाय, ओबीसी और दलित वर्ग

    पाटीदार समुदाय, ओबीसी और दलित वर्ग

    गौरतलब है कि पटेल, पाटीदार समुदाय, अल्पेश ओबीसी और मेवाणी दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन इन तीनों के रहते भी पंजे का हाथ खाली ही नजर आ रहा है। राज्य में पाटीदार समुदाय करीब 12 फीसदी हैं।

    नहीं जीत पाए भरोसा..राहुल

    नहीं जीत पाए भरोसा..राहुल

    वहीं ओबीसी वर्ग करीब 30 फीसदी हैं लेकिन इन सबके बावजूद कांग्रेस के सत्ता का ख्वाब भी पूरा होता नहीं दिख रहा है, शायद इसके पीछे पीएम मोदी के प्रति लोगों का वो भरोसा है, जो राहुल गांधी तमाम कोशिशों के बावजूद भी हासिल नहीं कर पाए।

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