नाम की वजह से 'विदेशी' घोषित हुई थी महिला, जानिए 6 साल बाद कैसे पता चला कि भारतीय है?
एक भारतीय को वर्षों तक अपने ही देश में विदेशी नागरिक माना गया हो, यह हमारे सिस्टम के लिए बहुत बड़ी विडंबना है। लेकिन, असम में एक महिला को यह विडंबना झेलनी पड़ी है। एक से ज्यादा वोटर लिस्ट में नाम में गड़बड़ी होने की वजह से 6 वर्षों तक उसे विदेशी नागरिक की तरह रहने को मजबूर होना पड़ा। दो वर्षों से ज्यादा तो जेल काटनी पड़ी।
50 साल की दुलुबी बीबी असम के कछार जिले के उधरबोंड इलाके की निवासी हैं। 1998 के एक केस की सुनवाई के दौरान अवैध प्रवासी (न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारण) अधिनियम (2015 में विदेशी न्यायाधिकरण अधिनियम के तहत फिर से पंजीकृत ) के तहत 20 मार्च, 2017 को उन्हें सिलचर के फॉर्नर्स ट्रिब्यूनल-3 की ओर से विदेशी (बांग्लादेश से अवैध अप्रवासी)घोषित कर दिया गया था।

2017 में ट्रिब्यूनल घोषित किया था 'विदेशी'
दरअसल, तब ट्रिब्यूनल के सदस्य बीके तालुकदार ने अपने आदेश में कहा था कि दुलुबी बीबी यह साबित करने में नाकाम रही हैं कि उनका और उनके पिता का जन्म भारत में हुआ था और वे 1971 से पहले से यहां रहती हैं। इस आधार पर ट्रिब्यूनल ने माना कि वो अवैध तरीके से भारत आई हैं।
नामों में गड़बड़ी की वजह से जिंदगी में आ गई आफत
इस दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि विभिन्न वोटर लिस्ट में उनकी पहचान अलग नामों से हुई है और नामों में यह गड़बड़ी उनके पिता और दादा के नाम के साथ भी है। ट्रिब्यूनल ने पुलिस को दुलुबी बीबी को गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने का भी आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली थी जमानत
बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें डिटेंशन सेंटर से जमानत पर रिहा किया गया था। इस साल मई में उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट में 2017 के फॉर्नर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी थी। कछार के डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने उन्हें मुफ्त कानूनी सहायती उपलब्ध करवाई और उनके लिए महितोश दास नाम के एक वकील को नियुक्त किया था।
गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश पर दोबारा सुनवाई
दास के मुताबिक हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को उनके केस को फिर से सुनने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा, 'ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान दुलुबी बीबी ने दावा किया कि उनके पास अपने दादा के साथ संबंध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं, जिनका नाम 1965 से पहले के कई वोटर लिस्ट में आ चुका था। '
उसी ट्रिब्यूनल ने 6 साल बाद की उनके भारतीय नागरिक होने की घोषणा
वकील ने बताया कि 6 साल बाद ट्रिब्यूनल के वही सदस्य बीके तालुकदार ने उनके सामने पेश किए गए साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर उनके भारतीय नागरिक होने की घोषणा की, जो 2017 में उन्हें अवैध प्रवासी घोषित कर चुके थे।
दुलुबी बीबी भारत की नागरिक हैं- ट्रिब्यूनल
तालुकदार के आदेश की कॉपी दुलुबी बीबी को गुरुवार को ही उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने इस हफ्ते अपने आदेश में कहा है, '......मेरी यह सुविचारित राय है कि ओपी (ORDER OF PROTECTION) (दुलुबी बीबी) भारत की नागरिक हैं, जो भारत की धरती पर रहने वाले भारतीय नागरिकों की संतान हैं।'
ट्रिब्यूनल के पहले वाले आदेश की वजह से सिराई उद्दीन लस्कर की बेटी और बकतार उद्दीन की पत्नी दुलुबी बीबी को सिलचर जेल के अंदर दो वर्षों से ज्यादा समय तक डिटेंशन सेंटर में गुजारने पड़े थे। (इनपुट-पीटीआई और दुलुबी बीबी की तस्वीर सौजन्य: असम ट्रिब्यून)












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