महिला ने की थी दूसरे धर्म में शादी, मौत के बाद ना दफनाने दिया गया ना जलाने
मुस्लिम से शादी करने वाली महिला को ना दफनाने दिया गया ना जलाने
नई दिल्ली। घर से भागकर मुस्लिम युवक से शादी करने की सजा असम की एक युवती को मरने के बाद भी भुगतनी पड़ी। मौत के बाद हिन्दू और मुसलमान दोनों ही समुदाय के लोगों ने उसके अंतिम संस्कार के लिए श्मसान और कब्रिस्तान में जगह देने से इंकार कर दिया। दो दिन शव के पड़े रहने के बाद पुलिस ने मामले में दखल देकर अंतिम संस्कार कराया।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, असम के तिनसुकिया जिले की 23 साल की तुलसी दास ने एक महीने पहले घर से भाग कर मार्घेरिटा कस्बा के मुस्लिम युवक बिट्टू अली से शादी कर ली थी। जिसके बाद उसके परिवार वाले उससे खफा थे, वहीं ससुराल के लोग भी नाराज ही रहे। शनिवार को तुलसी ने आत्महत्या कर ली। उसकी मौत के बाद स्थानीय कब्रिस्तान और श्मशान दोनों ने ही महिला के अंतिम संस्कार के लिए जगह देने से इनकार कर दिया।
तीन दिन तक बिट्टू तुलसी का शव लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों से उसे दफनाने और हिन्दू समुदाय के लोगों से जलाने के लिए जगह देने की गुहार करता रहा लेकिन कोई भी तैयार ना हुआ। दो दिन बाद सोमवार को पुलिस ने मामले में दखल दी जिसके बाद तुलसी का हिन्दू रिति-रिवाज से अतिम संस्कार हुआ।
पुलिस ने मृतका के माता-पिता को अंतिम संस्कार के लिए मनाया
तिनसुकिया के एसपी मुग्धाज्योति देव महंता ने बताया कि शनिवार को जब बिट्टू अली तुलसी दास का शव लेकर कब्रिस्तान गए तो मृतका के हिन्दू होने की बात कहकर उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। कब्रिस्तान में जगह ना मिलने पर बिट्टू अली तुलसी दास का शव लेकर श्मशान स्थल गए लेकिन वहां दास ने एक मुसलमान से शादी करने की बात कहते हुए उसे वहां अतिम संस्कार की अनुमति नहीं मिली और उनके साथ मारपीट की गई।
दोनों धर्मों के अंतिम संस्कार स्थल पर जगह मिलने के बाद तुलसी दास का शव लेकर अली रविवार को पुलिस थाने में पहुंचे। जिसके बाद सोमवार को एसपी ने खुद मामले की जानकारी लेते हुए मृतका के माता-पिता से बात की और तुलसी के शव को उसके माता-पिता के पास भिजवाया। जिसके बाद उन्होंने बेटी का अंतिम संस्कार किया।












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