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Assam Chunav Results 2021:असम में बड़ी जीत के बाद भी भाजपा की क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती ?

गुवाहाटी, 2 मई: असम विधानसभा चुनाव के लिए हो रही वोटों की गिनती से स्पष्ट पता चल रहा है कि वहां भाजपा गठबंधन फिर से सत्ता पर काबिज होने जा रहा है। सभी 126 सीटों के जो चुनाव नतीजे अबतक सामने आए हैं या फिर रुझानों से लग रहा है, उसमें भाजपा की अगुवाई वाला सत्ताधारी गठबंधन बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार करता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का उसका सपना बुरी तरह टूट चुका है, लेकिन असम से उसे बहुत बड़ी संजीवनी हाथ लगी है। लेकिन, उसके सामने चुनौती ये है कि इसबार वहां मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए? गौरतलब है कि सर्बानंद सोनोवाल के पांच साल तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद चुनाव से पहले पार्टी ने किसी भी नेता को वहां सीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं किया है। दूसरा नाम असम ही नहीं पूरे पूर्वोत्तर में पार्टी के लिए हर मर्ज की दवा माने जाने वाले कद्दावर नेता हिमंत बिस्वा सरमा का है, जिनसे बड़ा कद्दावर चेहरा पार्टी के पास पूरे इलाके में नहीं है।

क्या सर्बानंद सोनोवाल फिर से बनेंगे असम के मुख्यमंत्री ?

क्या सर्बानंद सोनोवाल फिर से बनेंगे असम के मुख्यमंत्री ?

असम में बीजेपी इसबार जिस पैटर्न पर चुनाव लड़ी है, वह उसके सामान्य चाल-चेहरा और चरित्र के दावे वाली राजनीति से अलग है। मसलन, सर्बानंद सोनोवाल जैसा चेहरा होते हुए भी पार्टी ने उन्हें सीएम के तौर पर चुनावों में पेश नहीं किया है। पार्टी नेताओं से जब भी इसको लेकर सवाल किया गया तो सिर्फ एक ही जवाब आया कि चुनाव के बाद ये पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा। रविवार को जब यह साफ हो गया कि भाजपा असम में आगे भी पांच साल के लिए सत्ता पर काबिज रहने जा रही है तो एकबार फिर यह सवाल पार्टी के उपाध्यक्ष और असम के प्रभारी जय पांडा से किया गया तो उनका वही रटा-रटाया जवाब आया- 'इस पर हमारा पार्लियामेंट्री बोर्ड कोई फैसला लेगा।'

सर्बानंद सोनोवाल या हिमंत बिस्वा सरमा ? भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

सर्बानंद सोनोवाल या हिमंत बिस्वा सरमा ? भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

मौजूदा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की दावेदारी इसलिए मजबूत है, क्योंकि उनके नेतृत्व में पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। उनका व्यक्तित्व सौम्य है और उन्होंने बिना किसी खास विवाद के पांच साल सरकार चलाकर दिखाया है। वहीं हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का बहुत बड़ी चेहरा बनकर उभरे हैं। माना जा रहा है कि कोविड-19 महामारी से निपटने और प्रदेश के वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने जो अपना नेतृत्व कौशल और मैनेजमेंट स्किल दिखाया है, उससे कांग्रेस की अगुवाई वाले महाजोत के दावों की हवा उड़ाने में पार्टी को बहुत ज्यादा मदद मिली है। इसीलिए पार्टी नेतृत्व को इसबार सीएम पद पर फैसला करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

हिमंत बिस्वा सरमा माने जा रहे हैं सीएम पद के दावेदार

हिमंत बिस्वा सरमा माने जा रहे हैं सीएम पद के दावेदार

हिमंत बिस्वा सरमा इसबार चुनाव नहीं लड़ना चाह रहे थे। लेकिन, नेतृत्व के कहने पर वो इसके लिए तैयार हो गए। भाजपा की प्रदेश इकाई पर उनकी पकड़ किसी से छिपी नहीं है और बीजेपी जीती है तो वह उसके एक बड़े रणनीतिकार रहे हैं। उन्हें पूर्वोत्तर भारत में पार्टी का मजबूत स्तंभ माना जाता है, यह भी कहा जाता है कि क्षेत्र में पार्टी का कोई भी मसला हो, गृहमंत्री अमित शाह उनपर बहुत ही ज्यादा भरोसा करते हैं। लेकिन, सवाल है कि सोनोवाल को बदलने का पार्टी के सामने कारण क्या है? उन्होंने अच्छा प्रदर्शन करके दिखाया है, उसकी छवि अच्छी है, अलबत्ता पार्टी पर उनसे अधिक पकड़ सरमा की है। यही नहीं कांग्रेस से आने के बाद पूरे पूर्वोत्तर में पार्टी को मजबूत करने के लिए हिमंत ने जो योगदान दिया है, पार्टी के सामने उसका पुरस्कार देने का भी यह बहुत बड़ा मौका है।

पीएम मोदी ही करेंगे आखिरी फैसला !

पीएम मोदी ही करेंगे आखिरी फैसला !

भाजपा सूत्रों की मानें तो असम में कौन बनेगा मुख्यमंत्री, इसका फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ही करेंगे। लेकिन, शायद अंतिम निर्णय पीएम मोदी का होगा। बड़ा सवाल है कि वह हिमंत बिस्वा सरमा को पार्टी के लिए उनके काम का बड़ा पुरस्कार देते हैं या फिर सोनोवाल को असम की पांच साल की सेवा को आगे भी जारी रखने के लिए उनके नाम को हरी झंडी दिखाते हैं?

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