आशाराम चौधरी से ओबीसी सर्टिफिकेट के लिए मांगी गई थी रिश्वत, तब इन्होंने की मदद

पहले ही प्रयास में एम्स का मेडिकल एंट्रेंस निकालने वाले आशाराम चौधरी की हर जगह तारीफ हो रही है। मध्य प्रदेश की एक छोटी सी जगह से ताल्लुक रखने वाले आशाराम अपना सपना जरूर पूरा करने जा रहे हैं, लेकिन उनके लिए ये सब आसान नहीं था।

Asharam Choudhary

नई दिल्ली। पहले ही प्रयास में एम्स का मेडिकल एंट्रेंस निकालने वाले आशाराम चौधरी की हर जगह तारीफ हो रही है। मध्य प्रदेश की एक छोटी सी जगह से ताल्लुक रखने वाले आशाराम अपना सपना जरूर पूरा करने जा रहे हैं, लेकिन उनके लिए ये सब आसान नहीं था। ऑल इंडिया में 707 और ओबीसी उम्मीदवारों में 121वीं रैंक हासिल करने वाले आशाराम को बचपन में सर्टिफिकेट बनवाने के लिए भी कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। जब आशाराम ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने गए थे, तब अधिकारी ने उनसे घूस मांगी थी।

ओबीसी सर्टिफिकेट बनावाने में लगी मेहनत

ओबीसी सर्टिफिकेट बनावाने में लगी मेहनत

द वीक नें छपी खबर के अनुसार आशाराम के पिता रंजीत चौधरी ने बताया कि उनके बेटे की सफलता में ओबीसी सर्टिफिकेट ने काफी मदद की। इस सर्टिफिकेट की मदद से ही आशाराम को जवाहस नवोदय विद्यालय और फिर दक्षिणा फाउंडेशन में दाखिला मिला। ये सर्टिफिकेट उनके लिए मददगार साबित हुआ, इसे बनवाने में उन्हें उतने ही पापड़ बेलने पड़े। आशाराम ने बताया कि अधिकारियों ने ये सर्टिफिकेट देने के लिए उनसे घूस मांगी थी।

एडिशनल-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने की थी मदद

एडिशनल-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने की थी मदद

आर्थिक रूप से कमजोर आशाराम घूस नहीं दे सकते थे, तब जाकर उन्होंने स्थानीय एडिशनल-डिविजनल मजिस्ट्रेट कैसाश बुंदेला की मदद ली थी। कैलाश बुंदेला ने ही आशाराम को बैकवर्ड कास्ट का सर्टिफिकेट दिलवाया था। बुंदेला ने फिर आशाराम को बाकी सरकारी स्कीमों के तहत सहायता मुहैया कराई। आशाराम चौधरी ने एम्स की मेडिकल परीक्षा पास करने के बाद एम्स जोधपुर में दाखिला ले लिया है। आशाराम काफी गरीब परिवार से आते हैं और उनके पिता कूड़ा बीनने का काम करते हैं।

सरकार उठाएगी पढ़ाई का खर्चा

सरकार उठाएगी पढ़ाई का खर्चा

इतने गरीब परीवार से आने के कारण आशाराम एंट्रेस पास करने के बाद भी कॉलेज में दाखिला नहीं ले पा रहे थे, तब मध्य प्रदेश सरकार आशाराम की मदद को आगे आई। प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने खुद ट्वीट कर आशाराम को आर्थिक मदद देने का वादा किया। इसके साथ ही आशाराम के परिवार को सरकारी योजनाओं के तहत घर और बिजली भी दी जाएगी। आशाराम ने अपनी जिंदगी में काफी गरीबी झेली है और इन सब मुश्किलों को पार करके वो ये मुकाम हासिल करने में कामयाब रहे।

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