'क्या इसलिए असीम मुनीर ने ट्रंप के साथ लंच किया?' ईरान पर US के हमले को लेकर ओवैसी ने पाकिस्तान को किया बेनकाब
ईरान और इजराइल के बीच जारी जंग और अमेरिका के ईरान की तीन परमाणु साइट्स पर हमलों को लेकर भारत में भी सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान और अमेरिका की भूमिका पर तीखा हमला बोला है।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने इसी मकसद से अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लंच किया था? उन्होंने कहा कि आज सभी के चेहरे बेनकाब हो गए हैं।
AIMIM चीफ ने कहा कि, 'क्या पाकिस्तान ने इसी वजह से डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज (Nobel Peace Prize) के लिए नामित किया था? क्या इसी मकसद से उनके आर्मी चीफ ने ट्रंप के साथ बैठकर खाना खाया था?

ओवैसी ने आरोप लगाया कि, 'ट्रंप ने अपने ही देश के संविधान का उल्लंघन किया है, यूनाइटेड नेशंस चार्टर (United Nations Charter) का उल्लंघन किया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों (International Law) का भी उल्लंघन किया है।
ईरान के परमाणु साइट्स पर US का अटैक
दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि अमेरिकी बी-2 स्पिरिट बमवर्षक विमानों ने मिसौरी से लगभग 37 घंटे तक बिना रुके उड़ान भरी और रविवार को सुबह-सुबह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमला' किया, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'बहुत सफल हमला' बताया है।
अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को दी चेतावनी
जैसे ही अमेरिका इजराइल की तरफ से ईरान के खिलाफ जंग में शामिल हुआ, कुछ ही घंटों के अंदर ईरान के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने चेतावनी दी कि वे देर किए बिना जवाब देंगे।
दुनिया की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है असर
खामेनेई के खास प्रतिनिधि हुसैन शरियतमदारी ने ईरानी मीडिया को बताया कि पहला कदम ये होगा कि ईरान बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के बेस पर मिसाइल हमला करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा, जिससे दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ेगा।
असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के उस फैसले को लेकर निशाना साधा है, जब उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को 2026 नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए नामित किया ।
ट्रंप को इस सम्मान के लिए नॉमिनेट करने की वजह बताई गई- भारत-पाक हालिया संघर्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति की कूटनीतिक भूमिका! हद तो तब हो गई जब इस नॉमिनेशन की घोषणा खुद पाक सरकार ने शान से X (पूर्व ट्विटर) पर की और खुद को शांति की मिसाल दिखाने की कोशिश की।
आर्मी चीफ से लेकर व्हाइट हाउस तक नाटक
नॉमिनेशन के ड्रामे से पहले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर (Asim Munir) खुद ट्रंप से व्हाइट हाउस में मिले। पहले से तय लंच मीटिंग में वो ट्रंप से नोबेल की सिफारिश की बात कह चुके थे। पाकिस्तानी मीडिया और अधिकारी इस मीटिंग को भी 'डिप्लोमैटिक विक्ट्री' बताने में जुटे हैं, जबकि सच ये है कि पाकिस्तान ने खुद ही संघर्ष को हवा दी थी और अब शांति का नाटक रच रहा है।












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