असदुद्दीन ओवैसी बोले- अजीत डोवाल बताएं, कौन फैला रहा है कट्टरता

नई दिल्ली, 01 अगस्त। एआईएमआईएम के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें बताना चाहिए कि देश में कौन है जो कट्टरता फैला रहा है। ओवैसी ने कहा कि हम उम्मीद कर रहे थे कि एनएसए हर किसी को बताएंगे कि ये कुछ तत्व कौन हैं जो देश में कट्टरता फैला रहे हैं। उन्हें बिना हिचक बोलना चाहिए, उन्हें बताना चाहिए। बता दें कि डोवाल ने एक कार्यक्रम के दौरान हर धर्म और संप्रदाय को मानने वालों से अपील की कि वह कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ लड़ें और देश में समरसता का माहौल बनाएं। धर्म और विचारधारा की कट्टरता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश पर प्रभाव पड़ता है।

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    Asaduddin Owaisi ने NSA Ajit Doval से पूछा कौन फैला रहा है कट्टरता? | वनइंडिया हिंदी |*Politics
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    एक कॉन्फ्रेंस के दौरान अजीत डोवाल ने कहा कि कुछ लोग देश में वैमनस्यता फैला रहे हैं, ये लोग धर्म के नाम पर यह कर रहे हैं, लेकिन धर्म के नाम पर कट्टरता का देश पर अंतरराष्ट्रीय असर होता है। हर किसी को धार्मिक कट्टरता के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। आपसी सद्भाव को बढ़ाना चाहिए। अजीत डोवाल ऑळ इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल की ओर से आयोजित कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। इस दौरान मुस्लिम धर्मगुरू ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

    हालांकि ओवैसी ने अजीत डोवाल से यह पूछा है कि कौन देश में कट्टरता फैला रहा है, लेकिन उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि पीएफआई को बैन करना चाहिए या नहीं। बता दें कि पीएफआई कट्टरपंथी इस्लामिक संस्था है, जो देश की सुरक्षा एजेंसियों की राडार पर है, इस संगठन पर देश में कई दंगे फैलाने और अन्य तरह की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है। ओवैसी सब जब पूछा गया कि क्या आप हार्डलाइनर हैं तो उन्होंने कहा कि भारत में सिर्फ हम ही हार्डलाइनर हैं, बाकी सब पवित्र हैं।

    श्रीलंका के हालात को लेकर ओवैसी ने कहा कि यह स्थिति श्रीलंका की सरकार ने तैयार की है, उन्होंने बेरोजगारी के आंकड़े छिपाए, देश के लोगों के लिए महंगाई बढ़ाई। आंकड़ों को लोगों के सामने लाना चाहिए। हम उम्मीद करते है कि भारत में इस तरह के हालात ना आए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि कार्यपालिका देश को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, संसद को कमजोर किया जा रहा है जिसकी वजह से बहस कम हो रही है। ओवैसी ने कहा कि मानसून सत्र में 14 बिल पेश किए गए और कुछ ही देर में वह पास हो गए। एक साल में संसद सत्र 60-65 दिन के लिए होता है, ऐसे में कैसे आम लोगों के मुद्दों को उठाया जा सकता है।

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